असम में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कामाख्या रेलवे स्टेशन पर बांग्लादेशी घुसपैठियों के एक बड़े झुंड को दबोचा है। 8 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी स्थित रेलवे स्टेशन पर हुई इस कार्रवाई में 57 बांग्लादेशियों को हिरासत में लिया गया है।
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा ग्रुप जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से भागकर असम पहुंचा था, ताकि यहां से वापस बांग्लादेश जा सके या पूर्वोत्तर में छिप सके। ये सभी पहले कश्मीर से दिल्ली और फिर दिल्ली से गुवाहाटी तक ब्रह्मपुत्र मेल ट्रेन से आए।
इन सभी 57 बांग्लादेशियों को को फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के सामने पेश कर उन्हें वापस बांग्लादेश डिपोर्ट करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
असम पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि इतनी बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए भारत के एक कोने (कश्मीर) से दूसरे कोने (असम) तक बिना किसी वैध परमिट के 2,500 किलोमीटर की यात्रा कैसे तय कर गए।
सवाल यह है कि आखिर ये लोग कितने सालों तक जम्मू-कश्मीर में कैसे रह रहे थे, पुलिस की कार्रवाई के बाद किस रास्ते से निकले और क्या उनकी आवाजाही में किसी नेटवर्क ने मदद की? सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
घुसपैठियों के झुंड को पकड़ने में कैसे मिली कामयाबी ?
सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया इनपुट मिला था कि दिल्ली से आ रही ब्रह्मपुत्र मेल में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक सवार हैं। जैसे ही ट्रेन गुवाहाटी के कामाख्या रेलवे स्टेशन पर रुकी, आरपीएफ और जीआरपी (GRP) की टीमों ने बोगियों की सघन तलाशी ली।
जांच के दौरान जब यात्रियों से उनके पहचान पत्र और भारतीय नागरिकता के दस्तावेज मांगे गए, तो ये 57 नागरिक कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। पुलिस की कड़ी पूछताछ में इन्होंने स्वीकार किया कि वे बांग्लादेश के मूल निवासी हैं और लंबे समय से श्रीनगर में अवैध रूप से रह रहे थे।
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यह समूह पहले जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से दिल्ली आया और फिर वहां से असम।
जम्मू-कश्मीर से क्यों भागे घुसपैठिए ?
खुफिया और पुलिस रिपोर्टों से साफ हुआ है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हाल ही में घाटी में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए बड़े पैमाने पर मुहिम शुरू की है।
- इस मुहिम के तहत अकेले कश्मीर में सैकड़ों बांग्लादेशी नागरिकों को चिन्हित किया गया था।
- प्रशासन ने 5 अक्टूबर 2026 को जम्मू-कश्मीर से 150 बांग्लादेशी घुसपैठियों को डिपोर्ट करने के लिए पश्चिम बंगाल के बागडोगरा भेजा था।
- कानून के सख्त शिकंजे और बड़े स्तर पर हो रही धरपकड़ के डर से ही 57 लोगों का यह जत्था श्रीनगर के पंथा चौक और आसपास के इलाकों को छोड़कर रातों-रात भाग निकला था।
असम बना प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट ?
जम्मू-कश्मीर से असम तक बांग्लादेशी घुसपैठियों की आवाजाही ने सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान खींचा है। 57 बांग्लादेशियों को दबोचने की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब पिछले कुछ दिनों में गुवाहाटी और आसपास के इलाकों में घुसपैठियों/अवैध विदेशी नागरिकों के खिलाफ सुरक्षा ग्रिड को बेहद मजबूत किया गया है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या असम दूसरे राज्यों से निकलने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए ट्रांजिट पॉइंट बन रहा है?
लगातार सामने आई गिरफ्तारियों ने असम में विदेशी नागरिकों की आवाजाही और संभावित ट्रांजिट मार्गों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। गुवाहाटी पूर्वोत्तर भारत का एक प्रमुख रेल और सड़क परिवहन केंद्र है। यहां से देश के अन्य हिस्सों और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचने के कई रास्ते उपलब्ध हैं। इसके अलावा खास बात यह कि असम की भी सीमा बांग्लादेश से लगी हुई है।
ब्रह्मपुत्र मेल की इस घटना से ठीक पहले, शहर के विभिन्न हिस्सों और होटलों से 22 से अधिक अन्य बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस ने इन घुसपैठियों को पनाह देने और फर्जी भारतीय आधार कार्ड उपलब्ध कराने के आरोप में होटल मालिक अमित रॉय डेमरी सहित चार स्थानीय मददगारों को भी दबोचा है।
| स्थान / ऑपरेशन | गिरफ्तार/हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या | मुख्य विवरण |
| कामाख्या रेलवे स्टेशन (ब्रह्मपुत्र मेल), 08 अक्टूबर | 57 बांग्लादेशी घुसपैठिए | श्रीनगर से दिल्ली होते हुए असम पहुंचे; नागरिकता के पुख्ता दस्तावेज नहीं। |
| पानबाजार और पलटन बाजार होटल, 7 अक्टूबर , 2026 | 13 बांग्लादेशी घुसपैठिए (महिलाएं व बच्चे शामिल) | श्रीनगर के पंथा चौक से भागकर दिल्ली के रास्ते गुवाहाटी पहुंचे थे। रिपोर्टें हैं कि ये सभी 13-14 साल से यहां रह रहे थे। |
| लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस 6 अक्टूबर, 2026 | 5 संदिग्ध (1 पुरुष, 4 महिलाएं) | मेघालय की डॉकी (Dawki) सीमा से भारत में घुसकर मुंबई भागने की फिराक में थे। |
| न्यू बोंगाईगांव रेलवे स्टेशन, 30 सितंबर,2026 | 9 बांग्लादेशी नागरिक | तलाशी में 4 बांग्लादेशी आईडी, 1 पासपोर्ट और 3 फर्जी भारतीय आधार कार्ड बरामद। |
राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर खड़े गंभीर सवाल
बांग्लादेशियों के मामलों ने भारतीय रक्षा और आंतरिक सुरक्षा एक्सपर्ट को चौंका दिया है। एक प्रतिबंधित सीमा पार कर भारत के एक छोर (पूर्वोत्तर) से प्रवेश करके देश के सबसे संवेदनशील रणनीतिक क्षेत्र (जम्मू-कश्मीर) तक पहुंच जाना और वहां डेढ़ दशक तक बिना पकड़े रहे आना, सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस पूरे नेटवर्क के पीछे तीन प्रमुख सुरक्षा खामियां दिखाई देती हैं:-
- फर्जी दस्तावेजों का सिंडिकेट: न्यू बोंगाईगांव और गुवाहाटी में हुई गिरफ्तारियों के दौरान संदिग्धों के पास से फर्जी भारतीय आधार कार्ड और जाली पहचान पत्र बरामद हुए हैं. यह इस बात का प्रमाण है कि भारत के भीतर एक सक्रिय लॉजिस्टिक नेटवर्क काम कर रहा है, जो इन अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकों के रूप में पहचान दिलाने में मदद करता है।
- इंटर-स्टेट मूवमेंट: कश्मीर से असम की दूरी लगभग 2,500 किलोमीटर से अधिक है। इतनी लंबी दूरी को ट्रेनों और सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से तय करना और सुरक्षा चौकियों को चकमा देना यह दर्शाता है कि घुसपैठियों के पास सटीक रूट मैप और मददगार मौजूद हैं।
- होटल और लॉजिस्टिक्स की मिलीभगत: गुवाहाटी के पलटन बाजार में पुलिस ने एक ऐसे होटल का भंडाफोड़ किया है, जहां इन घुसपैठियों को पनाह दी गई थी। पुलिस ने होटल मालिक अमित रॉय डेमरी सहित चार स्थानीय मददगारों (बिशाल पॉल, हजरत अली और रंजन धर) को भी गिरफ्तार किया है। यह साफ करता है कि अवैध घुसपैठ को स्थानीय स्तर पर व्यावसायिक संरक्षण मिल रहा है।
असम की बांग्लादेश के साथ कितनी लंबी सीमा ?
असम की बांग्लादेश से लगी लगभग 263 किलोमीटर लंबी सीमा भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस इलाके में सीमा पार अवैध आवाजाही, तस्करी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को रोकने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा बल (BSF) की है, जबकि असम पुलिस दूसरी सुरक्षा परत के रूप में काम करती है।
| विवरण | जानकारी |
| बांग्लादेश से सीमा की लंबाई | भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अनुसार 263 किमी। असम सरकार के सीमा विभाग की वेबसाइट पर 267.5 किमी का आंकड़ा भी दर्ज है। |
| बांग्लादेश से लगे जिले | 4 जिले—धुबरी, दक्षिण सलमारा-मानकाचर, कछार और करीमगंज (वर्तमान नाम श्रीभूमि)। |
| सीमा की निगरानी | सीमा सुरक्षा बल (BSF) मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा की निगरानी करता है। असम पुलिस भी सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करती है। |
| सीमा पर बाड़बंदी सी (Border Fencing | असम सरकार के सीमा विभाग के अनुसार, 201.51 किमी सीमा पर बाड़ का उल्लेख है। |
| BSF की सीमा चौकियां (BOP) | असम सरकार के एक पुराने पेज पर 94 सीमा चौकियों का उल्लेख। हालांकि यह वर्तमान संख्या होने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। |
BSF की BOP यानी Border Out Post सुरक्षा चौकी है, जबकि LCS यानी Land Customs Station सीमा-पार व्यापार और सीमा शुल्क से जुड़ा केंद्र है। दोनों एक ही चीज नहीं हैं। असम के Land Customs Station के बारे में जानें-
| केंद्र/स्थान | जिला | स्थिति/भूमिका |
| सुतारकांडी (Sutarkandi) | करीमगंज (श्रीभूमि) | कार्यरत भूमि सीमा शुल्क स्टेशन (Land Customs Station—LCS)। सीमा पार व्यापार का प्रमुख केंद्र। |
| करीमगंज स्टीमर घाट (Karimganj Steamerghat) | करीमगंज (श्रीभूमि) | असम सरकार की सूची में कार्यरत Land Customs Station—LCS रूप में दर्ज। |
| मानकाचर (Mankachar) | दक्षिण सलमारा-मानकाचर | असम सरकार की सूची में कार्यरत Land Customs Station—LCS के रूप में दर्ज। |
| गोलकगंज (Golakganj) | धुबरी | Land Customs Station—LCS के रूप में सूचीबद्ध। सरकारी विवरण के अनुसार, यहां से पत्थर, स्टोन चिप्स और कोयले के एक्सपोर्ट का प्रावधान है। |
| महिषासन रेलवे स्टेशन (Mahisasan) | करीमगंज (श्रीभूमि) | सरकारी सूची में गैर-कार्यरत Land Customs Station—LCS के रूप में दर्ज। |
| धुबरी स्टीमर घाट (Dhubri Steamerghat) | धुबरी | सरकारी सूची में Land Customs Station—LCS; उपलब्ध सूची से इसकी वर्तमान सक्रिय स्थिति की पुष्टि नहीं। |








