यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सऊदी अरब के दो अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को निशाना बनाकर 6 और 7 अक्टूबर 2026 को किए गए अलग-अलग हमलों में तीन लोगों की मौत और 36 लोग घायल हुए हैं।
सऊदी अधिकारियों के मुताबिक अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और राजधानी रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया है। हूतियों ने 7 अक्टूबर को इन दोनों हमलों की जिम्मेदारी ली।
इन हमलों के जवाब में 7 अक्टूबर की देर रात सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में जवाबी कार्रवाई की और बाद में यानी 8 अक्टूबर को 82 हूती सैन्य लक्ष्यों को नष्ट करने का दावा किया।
लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। 8 अक्टूबर को फिर हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक और बैलिस्टिक मिसाइल दागी है। इस नए दावे की सऊदी अरब की ओर से तत्काल पुष्टि नहीं हुई है।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रियाद, सऊदी अरब का राजनीतिक और आर्थिक केंद्र है और किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के सबसे महत्वपूर्ण नागरिक विमानन केंद्रों में से एक है।
भारत ने अबहा और रियाद के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हूती हमलों की निंदा करते हुए Civilian infrastructure को निशाना बनाने को “पूरी तरह Unacceptable” बताया है। भारत ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और सऊदी अरब की जनता व सरकार के साथ एकजुटता जताई है।
अबहा एयरपोर्ट पर कितना घातक हमला ?
इन हमलों में सबसे घातक 6 अक्टूबर को अबहा एयरपोर्ट पर हुआ हमला है। एयरपोर्ट पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया। हमले में एयरपोर्ट की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा। यानी इस हमले का असर सिर्फ सैन्य ढांचे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे नागरिक विमानन व्यवस्था पर पड़ा। सऊदी प्रशासन के मुताबिक-
- इसमें दो महिला विदेशी महिलाओं की मौत हुई।
- इनमें एक मोरक्को और दूसरी अल्जीरिया की नागरिक थीं।
- अबहा हमले में 28 लोग घायल हुए हैं।
- घायलों में सऊदी नागरिकों के अलावा बांग्लादेश और फिलीपींस के निवासी भी शामिल थे।
- सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
राजधानी रियाद के एयरपोर्ट पर भी हमले में कितना नुकसान ?
इसके अगले दिन 7 अक्टूबर को सऊदी राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को ड्रोन/मिसाइल से निशाना बनाया गया। सऊदी के General Authority of Civil Aviation (GACA ) के मुताबिक –
- इस हमले में एक सूडानी नागरिक की मौत हुई और आठ लोग घायल हुए।
- घायलों में पांच सऊदी नागरिक, दो मिस्र के निवासी और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल है।
इन हमलों के जवाब में सऊदी ने क्या पलटवार किया ?
Reuters के मुताबिक, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने 7 अक्टूबर की देर रात बयान जारी कर कहा कि उसने यमन के सादा, होदेइदा, अल-जौफ और मारिब प्रांतों में 80 से अधिक हूती सैन्य ठिकानों पर हमला किया।
- बाद में गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने सटीक संख्या 82 सैन्य लक्ष्यों की बताई।
- इसमें सादा में 11 बैलिस्टिक मिसाइल स्टोरेज साइट, कमांड एवं कंट्रोल सेंटर, संचार प्रणालियां, मिसाइल/हथियार भंडार और हूती मुख्यालय शामिल होने का दावा किया गया।
- गठबंधन ने साफ चेतावनी दी है कि सऊदी नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों पर हमले “बिना सजा के नहीं रहेंगे।
हालांकि सऊदी के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
आखिर इतनी तेजी से क्यों बढ़ी लड़ाई ?
इस पूरे घटनाक्रम को केवल एयरपोर्ट हमलों तक देखना अधूरा होगा। इसके पीछे यमन के पश्चिमी हिस्से और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को लेकर चल रही बड़ी सैन्य लड़ाई है।
सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बल हाल के दिनों में हूतियों से लाल सागर के तटीय इलाकों और बाब अल-मंदेब के आसपास के क्षेत्रों को वापस लेने के लिए बड़ा अभियान चला रहे हैं। हालिया लड़ाई में धुबाब और मोखा जैसे रणनीतिक इलाकों का महत्व बढ़ गया है।
बाब अल-मंदेब, लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। इसके जरिए यूरोप और एशिया के बीच समुद्री व्यापार, खासकर स्वेज नहर से गुजरने वाला जहाज यातायात प्रभावित हो सकता है। इसलिए यहां सैन्य नियंत्रण का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
भारत के लिए भी बढ़ी चिंता
इस संघर्ष का असर भारत से दूर नहीं है। भारत के लिए लाल सागर-बाब अल-मंदेब मार्ग यूरोप और पश्चिमी बाजारों तक समुद्री व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण है। भारत ने सितंबर में ही सऊदी अरब में हूती हमलों की निंदा करते हुए कहा था कि नागरिक और आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना क्षेत्रीय सुरक्षा और बाब अल-मंदेब में नौवहन की स्वतंत्रता के लिए अस्वीकार्य है।
अगर एयरपोर्टों पर मिसाइल और ड्रोन हमले लगातार बढ़ते हैं और इसके साथ बाब अल-मंदेब के आसपास समुद्री लड़ाई भी तेज होती है, तो इसका असर जहाजों के बीमा, शिपिंग लागत, माल ढुलाई और ऊर्जा कीमतों पर पड़ सकता है।
यही वजह है कि आने वाले दिनों में सऊदी अरब और हूतियों के बीच जवाबी हमले पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं।
मक्का पैक्ट अब कागज से कितना जमीन पर ?
सऊदी अरब पर हूती हमलों के बीच सबसे बड़ा नया घटनाक्रम मक्का डिफेंस पैक्ट का सक्रिय होना है। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त 2026 को सामूहिक रक्षा समझौता किया था। इसके तहत एक सदस्य पर सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाता है। 5 अक्टूबर को रियाद में हुई आपात बैठक में तीनों देशों ने इस समझौते को व्यवहार में लागू करने और सऊदी अरब में पहले से तय सैन्य क्षमताओं और बलों की तेजी से तैनाती की दिशा में कदम उठाने का फैसला किया।
पाकिस्तान की सऊदी अरब में सैन्य मौजूदगी नई नहीं है। पाकिस्तानी सैनिक लंबे समय से Kingdom में प्रशिक्षण, सलाह और सुरक्षा से जुड़ी भूमिकाओं में मौजूद रहे हैं। मक्का पैक्ट ने इस पुराने सैन्य संबंध को अब सामूहिक रक्षा ढांचे से जोड़ दिया है।
पाकिस्तान ने नई तैनाती की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने जरूर कहा है कि पाकिस्तानी और तुर्की बल supporting role निभा रहे हैं और पाकिस्तान reconnaissance जैसी गतिविधियों में शामिल है।
Reuters के मुताबिक तुर्की, सऊदी अरब को मुख्य रूप से defensive और technical support दे रहा है। इसमें सैन्य उपकरण, हथियार प्रणालियां, intelligence sharing और air-defence सहायता शामिल है।
इन सभी बातों के बावजूद अभी यमन के अंदर पाकिस्तानी या तुर्की combat troops भेजने की सार्वजनिक घोषणा नहीं हुई है।
सऊदी अरब-यमन सरकार बनाम हूती क्यों ?
हूती यानी अंसार अल्लाह उत्तरी यमन से निकला ज़ायदी शिया विद्रोही आंदोलन है। उसने 2014 में धर्म के साथ सत्ता और क्षेत्रीय प्रभाव की लड़ाई में राजधानी सना पर कब्जा कर यमन की सरकार को चुनौती दी। और तब से सुन्नी बहुल यमन में गृह युद्ध चल रहा है।
सुन्नी बहुल सऊदी अरब ने 2015 में यमन सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया, क्योंकि रियाद नहीं चाहता था कि उसकी दक्षिणी सीमा पर हूतियों का नियंत्रण मजबूत हो।
वहीं शिया बहुल ईरान हूतियों का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समर्थक है। ईरान ने हूतियों को हथियार, सैन्य तकनीक, प्रशिक्षण और खुफिया सहायता दी है। इसलिए यमन का संघर्ष सऊदी-ईरान क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता का भी हिस्सा बन गया है।
2022 में एक संघर्षविराम के बाद लड़ाई काफी हद तक धीमी पड़ गई थी। लेकिन 2026 में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ यमन में भी पुराने मोर्चे फिर सक्रिय हो गए हैं।








