₹811 करोड़ की डिफेंस डील: एयरफोर्स को मिलेंगे ऐसे हथियार, दुश्मन के एयरबेस पर होगा दूर से ही वार

By Defence Detective

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INDIAN AIR FORCE GETTING MORE POWER FROM DEAL

भारतीय वायु सेना की ताकत बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक ऐसा अहम कदम उठाया है, जिसका सीधा संबंध दुश्मन के एयरफील्ड को दूर से निशाना बनाने की क्षमता से है। 23 सितंबर 2026 को रक्षा मंत्रालय ने भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ 160 Satellite Smart Anti-Airfield Weapons यानी SAT-SAAW और उनसे जुड़े उपकरणों की खरीद के लिए ₹810.79 करोड़ का करार किया

इस हथियार की खास बात यह है कि इसे फाइटर जेट से लॉन्च किया जाता है और यह लंबे स्टैंड-ऑफ डिस्टेंस से जमीन पर मौजूद महत्वपूर्ण टारगेट को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। यानी हर हमले में लड़ाकू विमान को दुश्मन के एयर डिफेंस के बेहद करीब जाकर बम गिराने की जरूरत नहीं होगी।

SAT-SAAW आखिर है क्या?

जैसाकि नाम से ही इसका उद्देश्य काफी हद तक स्पष्ट हो जाता है—Smart Anti-Airfield Weapon। यह कोई सामान्य बम नहीं, बल्कि लंबी दूरी का स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन एयर-टू-सर्फेस हथियार है। इसे लड़ाकू विमान से छोड़ा जाता है और यह ग्लाइड करते हुए जमीन पर लक्ष्य तक पहुंचता है।

इसका प्राइमरी इस्तेमाल एयरफील्ड से जुड़े टारगेट्स के खिलाफ है। इनमें रनवे जैसी महत्वपूर्ण संरचनाएं और अन्य जमीन आधारित सैन्य लक्ष्य शामिल हो सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात इसकी स्टैंड-ऑफ क्षमता यानी दुश्मन के लक्ष्य के बहुत करीब गए बिना, काफी दूरी से हमला करने की क्षमता है।

खासियतजानकारी
पूरा नामSatellite Smart Anti-Airfield Weapon (SAT-SAAW)
श्रेणीAir-to-Surface / Stand-off Precision Weapon
मुख्य भूमिकादुश्मन के एयरफील्ड और महत्वपूर्ण जमीन आधारित लक्ष्यों को निशाना बनाना
रेंज90–100 किमी तक (रिलीज कंडीशन पर निर्भर)
वजनकरीब 125 किलोग्राम
लंबाईकरीब 1.85 मीटर
सटीकताIN-GPS के साथ 7 मीटर से कम; seeker के साथ 3 मीटर से कम
लॉन्च प्लेटफॉर्मSu-30MKI, Jaguar और Hawk
विकासDRDO
उत्पादनBharat Dynamics Limited (BDL)
स्वदेशी सामग्रीकरीब 60%
खासियतविमान को लक्ष्य के काफी करीब गए बिना स्टैंड-ऑफ दूरी से हमला करने की क्षमता

कब तक होगी डिलीवरी ?

MoD के मुताबिक 160 SAT-SAAW और संबंधित उपकरणों की डिलीवरी 2027-28 से शुरू होगी और 2028-29 तक पूरी की जानी है।

सौदा ‘Buy (Indian-Indigenously Designed, Developed and Manufactured)’ श्रेणी में हुआ है। यानी ऐसा रक्षा सामान खरीदना जिसे भारत में डिजाइन, विकसित और निर्मित किया गया हो।

इसमें तीन बातें महत्वपूर्ण हैं:

  • Indian — खरीद भारतीय स्रोत से होती है।
  • Indigenously Designed & Developed — हथियार/सिस्टम का डिजाइन और विकास भारत में हुआ हो।
  • Manufactured — उसका निर्माण भी भारत में किया जाए।
  • इसमें न्यूनतम 50% स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) की शर्त होती है, जो गणना के तरीके और लागू नियमों के अनुसार निर्धारित होती है।

100 किलोमीटर की रेंज क्यों महत्वपूर्ण?

किसी एयरफील्ड पर हमला करने वाले जेट के लिए सबसे बड़ा खतरा केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि उसे बचाने वाली एयर डिफेंस व्यवस्था भी होती है। ऐसे में स्टैंड-ऑफ हथियार का फायदा यह है कि विमान लक्ष्य से काफी दूरी पर रहते हुए हथियार लॉन्च कर सकता है।

SAT-SAAW की रेंज 90–100 किलोमीटर तक है, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि हर परिस्थिति में हथियार ठीक 100 किलोमीटर दूर तक लक्ष्य को ही निशाना बनाएगा। क्योंकि मान की ऊंचाई, गति और रिलीज कंडीशन जैसे कारक ग्लाइड हथियार की वास्तविक पहुंच को प्रभावित करते हैं।

किन लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है?

रक्षा मंत्रालय के अनुसार SAT-SAAW को Jaguar, Hawk और Su-30 MKI जैसे प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है।

यहां Su-30MKI विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह IAF के प्रमुख लड़ाकू विमानों में शामिल है और इसकी लंबी दूरी तथा बड़े हथियार भार की क्षमता इसे ऐसे हथियारों के लिए उपयोगी प्लेटफॉर्म बनाती है।

वहीं Jaguar का इस्तेमाल लंबे समय से ग्राउंड-अटैक भूमिकाओं में होता रहा है। Hawk प्लेटफॉर्म से भी SAAW के परीक्षण हो चुके हैं।

DRDO ने 2021 में Hawk-I से SAAW का सफल परीक्षण किया था।

इस तरह एक ही हथियार को अलग-अलग विमान प्लेटफॉर्म से इस्तेमाल करने की क्षमता IAF को ऑपरेशनल विकल्प देती है।

हथियार में कितनी स्वदेशी तकनीक?

यहां इस करार का सबसे बड़ा ‘आत्मनिर्भर भारत’ एंगल सामने आता है। MoD के अनुसार SAT-SAAW में 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी। इसके अलावा इसके कुछ महत्वपूर्ण सब-सिस्टम को भी स्वदेशी बनाया जा रहा है। इनमें शामिल हैं:

  • Initial Measurement Unit (IMU)
  • Long Impact Delay Fuse
  • Twin Store Carrier

इससे केवल तैयार हथियार का निर्माण ही भारत में नहीं होगा, बल्कि उसके महत्वपूर्ण हिस्सों में भी घरेलू तकनीक और उत्पादन की हिस्सेदारी बढ़ेगी। यही वजह है कि ₹810.79 करोड़ की यह डील भारत के स्वदेशी हथियार प्रोडक्शन सिस्टम के लिए भी महत्वपूर्ण है।

सटीकता की ताकत?

SAT-SAAW की खासियत सिर्फ दूरी नहीं, बल्कि precision strike क्षमता भी है। BDL के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इसकी accuracy IN-GPS के साथ 7 मीटर से कम और seeker के साथ 3 मीटर से कम बताई गई है।

यानी यह ऐसा हथियार है जिसे बड़े इलाके पर सामान्य बमबारी के बजाय निर्धारित जमीन आधारित लक्ष्य पर ज्यादा सटीक हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है।

यही संयोजन—स्टैंड-ऑफ रेंज + precision guidance + fighter launch—SAT-SAAW को IAF के लिए उपयोगी बनाता है।

यह हथियार IAF के लिए क्यों अहम है?

आधुनिक युद्ध में किसी एयरफोर्स के लिए अपने एयरफील्ड को सुरक्षित रखना जितना जरूरी है, उतना ही विरोधी के एयरफील्ड को सैन्य ऑपरेशन से बाहर करना भी महत्वपूर्ण होता है। यानी दुश्मन के एयरफील्ड को नुकसान पहुंचान भी आवश्यक होता है।

SAT-SAAW इसी तरह की क्षमता के लिए तैयार किया गया है। किसी दुश्मन एयरफील्ड की रनवे या अन्य महत्वपूर्ण सुविधाओं को नुकसान पहुंचाने से वहां से लड़ाकू विमानों की उड़ान और संचालन प्रभावित किया जा सकता है।

SAT-SAAW की induction से IAF की operational capability बढ़ेगी और देश की defence preparedness मजबूत होगी।

यहां एक और महत्वपूर्ण बात है—SAT-SAAW को IAF की पूरी स्ट्राइक क्षमता का अकेला हथियार समझना सही नहीं होगा। यह अलग-अलग लंबी दूरी के हथियारों और precision-strike systems के व्यापक नेटवर्क का एक हिस्सा है।

वायुसेना अभी क्या इस्तेमाल करती है ?

अगर सवाल SAT-SAAW के आने से पहले/इसके अलावा IAF एयरफील्ड और जमीन के महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर क्या इस्तेमाल करती है—तो इसका एक ही सीधा replacement नहीं है। IAF के पास अलग-अलग मिशन के लिए कई air-to-ground weapons हैं।

हथियारभूमिकाSAT-SAAW से संबंध
SPICE-2000Precision guided bomb; जमीन के महत्वपूर्ण/मजबूत लक्ष्यों पर हमलाSAT-SAAW की भूमिका से कुछ हद तक मिलती-जुलती
RAMPAGEStand-off air-to-ground missileज्यादा लंबी दूरी के stand-off strike के लिए
ROCKS / Crystal Maze-2Long-range air-launched ballistic missileहाई-वैल्यू और defended ground targets के लिए
अन्य guided bombs/missilesअलग-अलग ground targets पर precision strikeमिशन के अनुसार इस्तेमाल

RAMPAGE IAF के Su-30MKI और Jaguar पर इस्तेमाल होता है, जबकि ROCKS, जिसे IAF में Crystal Maze-2 भी कहा जाता है, Su-30MKI से इस्तेमाल किया जाता है और इसकी रेंज 250 किमी से अधिक बताई गई है।

वहीं SPICE-2000 का इस्तेमाल भारत ने पहले भी combat strike में किया है। 2019 के Balakot operation के संदर्भ में DRDO की प्रकाशित सामग्री में बताया गया है कि SAAW पर विचार हुआ था, लेकिन अंततः SPICE-2000 का इस्तेमाल किया गया।

हाल की Vayu Shakti-2026 में भी IAF के Rafale, Su-30MKI, Tejas और Mirage 2000 ने air-to-ground guided bombs और missiles से bunkers, runways और command centres जैसे लक्ष्यों पर precision strikes का प्रदर्शन किया था।

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