चीन के 6th जेनरेशन फाइटर J-36 को लेकर एक नई हथियार तकनीक सामने आई है। बीजिंग में एक रक्षा प्रदर्शनी में चीन ने लड़ाकू विमानों के लिए बनाए जा रहे एक लेजर हथियार के ट्रैकिंग और निशाना साधने वाले सिस्टम को प्रदर्शित किया है।
खास बात यह है कि इस सिस्टम को दिखाने वाली सामग्री में उसी बड़े, बिना tail वाले प्लेन की तस्वीर दिखाई गई, जिसे डिफेंस एक्सपर्ट J-36 के तौर पर पहचानते हैं।
सिस्टम को देखकर एक्सपर्ट का सवाल है कि क्या चीन अपने भविष्य के लड़ाकू विमानों को मिसाइलों से बचाने के लिए हाई-एनर्जी लेजर का इस्तेमाल करना चाहता है ? मिसाइलों के खिलाफ लेजर आधारित सुरक्षा कवच देने की तैयारी कर रहा है?
बीजिंग की प्रदर्शनी में क्या दिखा?
15 से 17 सितंबर 2026 के बीच बीजिंग में 14वीं China International Defence Electronics Exhibition आयोजित हुई। इसी प्रदर्शनी में चीन की सरकारी विमानन कंपनी AVIC के Beijing Precision Engineering Institute for Aircraft Industry ने “fighter aircraft laser-weapon tracking and aiming system” प्रदर्शित किया।
यह सामान्य ग्राउंड लेजर सिस्टम नहीं है। यह सिस्टम लड़ाकू विमान से लेजर हथियार को टारगेट दुश्मन पर सटीक निशाना साधने और उसे लगातार ट्रैक करने में मदद करेगा।
- सिस्टम का वजन 380 किलोग्राम से कम बताया गया।
- इसका वजन अमेरिकी माप में लगभग 838 पाउंड बैठता है।
- ट्रांसमिशन पावर का आंकड़ा “*00 kW” जैसा दिखाई दिया।
- शुरुआती अंक छिपा होने के कारण इसे कम से कम 100 kW माना जा सकता है, लेकिन सटीक पावर सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
- डायनेमिक ट्रैकिंग एक्यूरेसी भी छिपाई गई थी और केवल माइक्रोरेडियन स्तर का संकेत दिखाई देता है।
उपलब्ध तस्वीर से इतना ही कहा जा सकता है कि प्रदर्शित आंकड़ा कम से कम 100 kW की ओर संकेत करता है।
J-36 से इसका कनेक्शन क्यों निकला?
इस सिस्टम की प्रदर्शनी सामग्री में एक बड़े, tailless यानी बिना पारंपरिक पूंछ वाले विमान की तस्वीर दिखाई गई। चीनी सैन्य विमानन पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ एंड्रियास रूप्रेक्ट और रक्षा विश्लेषक मार्क काजेलेट ने इसे J-36 से जोड़ा।
J-36, चीन के एक बेहद बड़े, तीन इंजन वाले नए लड़ाकू विमान का अनौपचारिक नाम है। इसे पहली बार दिसंबर 2024 में चेंगदू के ऊपर उड़ते देखा गया था। इसे व्यापक रूप से चीन के छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम से जोड़ा जाता है, लेकिन इसका आधिकारिक नाम और अंतिम रोल सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
यहीं से लेजर वाली कहानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
इतने बड़े विमान में छोटे फाइटर की तुलना में पावर, कूलिंग और अतिरिक्त उपकरण रखने की ज्यादा गुंजाइश हो सकती है। हाई-एनर्जी लेजर के लिए यही तीन चीजें सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल हैं।
मिसाइल को लेजर आखिर करेगा क्या?
यहां लेजर का सबसे दिलचस्प संभावित इस्तेमाल सामने आता है। अगर किसी लड़ाकू विमान की तरफ हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल आ रही है, तो लेजर सिस्टम उसके खिलाफ एक अतिरिक्त रक्षात्मक परत दे सकता है। संभावित तरीके दो हो सकते हैं:-
1. मिसाइल के सेंसर को निशाना बनाना
मिसाइल के seeker यानी लक्ष्य खोजने वाले सेंसर को लेजर से नुकसान पहुंचाया या अस्थायी रूप से भ्रमित किया जा सकता है। इससे मिसाइल विमान को सही तरीके से ट्रैक करने में मुश्किल महसूस कर सकती है।
2. मिसाइल के हिस्से को physical नुकसान पहुंचाना
अगर लेजर पर्याप्त शक्ति और सही निशाने के साथ बहुत कम दूरी पर काम करे तो वह मिसाइल के किसी हिस्से को गर्म करके नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकता है।
लेकिन दोनों काम आसान नहीं हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक किसी मिसाइल को physically नुकसान पहुंचाने के लिए अपेक्षाकृत कम दूरी और पर्याप्त ऊर्जा की जरूरत होगी। वहीं सेंसर को चकाचौंध या नुकसान पहुंचाने की क्षमता ज्यादा दूरी पर भी उपयोगी हो सकती है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी चुनौती ?
असली मुश्किल लेजर बनाना नहीं, उसका उड़ते विमान से निशाना लगाना है। यहीं चीन के सामने सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती है। जमीन पर लगा लेजर अपेक्षाकृत स्थिर प्लेटफॉर्म पर काम करता है। लेकिन फाइटर विमान खुद तेज गति से उड़ रहा होगा, लगातार मुड़ रहा होगा और कंपन तथा हवा के दबाव से गुजर रहा होगा।
इसलिए सिस्टम को एक साथ कई काम करने होंगे:-
- तेजी से आने वाले लक्ष्य को पहचानना
- उसे लगातार ट्रैक करना
- विमान के कंपन और मूवमेंट की भरपाई करना
- लेजर बीम को बेहद सटीक तरीके से लक्ष्य पर रखना
- पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना
- पैदा होने वाली गर्मी को बाहर निकालना
- विमान के सेंसर और दूसरे डिफेंस सिस्टम से तालमेल बनाना
इसी वजह से प्रदर्शनी में दिखाया गया tracking and aiming system महत्वपूर्ण है। हाई-एनर्जी लेजर सिर्फ शक्तिशाली लेजर स्रोत का नाम नहीं है। उसे लक्ष्य पर लगातार सटीक तरीके से रखने की क्षमता भी चाहिए।
अमेरिका की इस तकनीकी का क्या हुआ ?
एयरबोर्न लेजर की मुश्किल सिर्फ चीन की समस्या नहीं है। अमेरिका ने भी SHiELD — Self-protect High Energy Laser Demonstrator कार्यक्रम के जरिए लड़ाकू विमानों को लेजर से मिसाइलों से बचाने की कोशिश की थी।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य फाइटर विमान पर पॉड में लगाए गए लेजर के जरिए आने वाली हवा से हवा और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से सुरक्षा की संभावना दिखाना था।
लेकिन विकास के दौरान हवा की गति, turbulence और विमान की तेज maneuvering जैसी समस्याएं सामने आईं। कार्यक्रम 2024 में समाप्त हुआ और किसी फाइटर टेस्ट विमान पर लेजर पॉड लगाने का प्रदर्शन नहीं हो सका।
इसका मतलब साफ है—कागज पर लेजर हथियार और वास्तविक युद्धक विमान पर काम करने वाला लेजर, दोनों अलग चीजें हैं।
चीन अभी यह साबित नहीं कर सका है-
- यह लेजर सिस्टम J-36 पर लगाया जा चुका है।
- J-36 ने इस लेजर के साथ उड़ान परीक्षण किया है।
- इसकी वास्तविक लेजर पावर कितनी है।
- यह कितनी दूरी पर मिसाइल को नष्ट कर सकता है।
- यह वास्तविक मिसाइल के खिलाफ सफलतापूर्वक परीक्षण कर चुका है।
- भविष्य में J-36 के उत्पादन मॉडल में यह सिस्टम अनिवार्य रूप से शामिल होगा।
हालांकि चीन की तैयारी का संकेत ज्यादा बड़ा है। चीन अब लड़ाकू विमान के लिए ऐसे लेजर सिस्टम की तकनीक सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कर रहा है, जिसे भविष्य में मिसाइलों से विमान की सुरक्षा में इस्तेमाल किया जा सकता है।








