अमेरिका ने एक ऐसी नेक्स्ट जेनरेशन एयर-टू-एयर मिसाइल का राज खोल दिया है, जिसका नाम तो कई साल से सामने था, लेकिन असल क्षमता दुनिया से छिपी हुई थी। अब पहली बार इसे बनाने वाली कंपनी Lockheed Martin ने खुद इसके बारे में खुलकर जानकारी दी है। नाम है AIM-260 JATM।
Reuters के मुताबिक, यह हथियार चीन से आने वाले तेजी से विकसित हो रहे लंबी दूरी के हवाई खतरों के जवाब में तैयार किया गया है।
17 सितंबर को Lockheed Martin ने AIM-260 Joint Advanced Tactical Missile यानी JATM के बारे में सार्वजनिक तौर पर जानकारी दी। उसी दिन कंपनी ने अमेरिका के रक्षा विभाग के साथ ऐसा समझौता भी घोषित किया, जिसका मकसद इस मिसाइल का उत्पादन तेजी से बढ़ाना है।
AIM-260 आखिर है क्या?
AIM-260 को अमेरिका ने Joint Advanced Tactical Missile (JATM) नाम दिया है। इसे अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के साथ Lockheed Martin ने डेवलप किया है।
इसका सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य मौजूदा एयर-टू-एयर हथियारों की तुलना में लंबी दूरी और बेहतर प्रभावशीलता उपलब्ध कराना है। हालांकि इसकी वास्तविक रेंज अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
AIM-260 को पुराने AIM-120 AMRAAM के बाद अगली पीढ़ी की क्षमता के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी रिकॉर्ड में भी JATM को AMRAAM को replace करने वाले कार्यक्रम के रूप में दर्ज किया गया है।
AIM-120 AMRAAM अमेरिकी Beyond Visual Range (BVR) air-to-air missile है, जिसमें active radar guidance और inertial guidance का इस्तेमाल होता है और यह सभी मौसम में दिन-रात लक्ष्य पर हमला कर सकती है।
पुराने AIM-120A/B/C variants की अमेरिकी वायुसेना द्वारा बताई गई रेंज 20+ मील (32+ किमी) है; नए AIM-120D/D-3 की वास्तविक अधिकतम रेंज सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई है
पहली तस्वीर कब आई थी?
AIM-260 जॉइंट एडवांस्ड टैक्टिकल मिसाइल (JATM) नाम की इस मिसाइल को कई सालों तक सिक्रेट ढंग से डेवलप किया गया है। लॉकहीड का कहना है कि यह हथियार अमेरिका की मौजूदा हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की तुलना में ज़्यादा रेंज और असरदार क्षमता देता है, जो J-20 जैसे चीनी लड़ाकू विमानों के खिलाफ एक फ़ायदा है।
AIM-260 पूरी तरह आज पहली बार सामने नहीं आई है। इसके अस्तित्व और विकास के बारे में पहले से जानकारी सार्वजनिक थी और मई 2026 में पहली तस्वीरें सामने आई थीं।
लेकिन 17 सितंबर को Lockheed Martin ने पहली बार खुद इस कार्यक्रम के बारे में खुलकर जानकारी दी और उत्पादन बढ़ाने की योजना को सार्वजनिक किया।
यानी मिसाइल की मौजूदगी पहले पता थी, लेकिन उसके पीछे की औद्योगिक और production strategy अब ज्यादा साफ हुई है।
किन अमेरिकी विमानों के साथ इस्तेमाल होगी यह मिसाइल ?
AIM-260 को stealth fighters के साथ इस्तेमाल करने की योजना है। यह F-22 और F-35 के साथ जोड़ी जाएगी।
F-22 Raptor पहले से ही stealth, sensor fusion और air-superiority role के लिए बनाया गया है। अमेरिकी वायुसेना के अनुसार F-22 की डिजाइन का एक प्रमुख उद्देश्य दुश्मन के हवाई खतरों को दूर से detect और engage करना है।
दूसरी तरफ F-35 Lightning II का बड़ा फायदा sensor fusion और situational awareness है।
ऐसे fighter के साथ लंबी दूरी की air-to-air missile जुड़ने पर missile अकेले हथियार नहीं रहती। Fighter के sensors, data links, targeting information और missile मिलकर एक पूरा combat system बनाते हैं।
चीन और J-20 के सामने क्यों बढ़ी जरूरत?
AIM-260 की कहानी को चीन से अलग करके देखना मुश्किल है। Reuters के अनुसार, अमेरिका इस मिसाइल को चीन की बढ़ती long-range air-threat capabilities के जवाब के तौर पर विकसित कर रहा है। रिपोर्ट में विशेष रूप से चीन के J-20 stealth fighter का उल्लेख किया गया है।
यहां चुनौती सिर्फ यह नहीं है कि किसी fighter के पास कितनी तेज मिसाइल है। आधुनिक हवाई युद्ध में सवाल यह है कि कोई fighter कितनी दूरी से दूसरे विमान को detect, track और engage कर सकता है और दुश्मन की electronic warfare capabilities के बावजूद engagement को कितना प्रभावी रख सकता है।
यही वजह है कि अमेरिका के लिए लंबी दूरी की air-to-air missile अब fighter modernization का अलग हिस्सा नहीं, बल्कि पूरी air-combat architecture का महत्वपूर्ण घटक बन गई है।
AIM-260 के मुकाबले चीन के पास क्या ?
AIM-260 के सामने चीन के पास कौन-सी मिसाइलें हैं?”, तो अभी इसका सीधा जवाब ठीक नहीं होगा क्योंकि AIM-260 की रेंज जैसी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं है। लेकिन चीन के पास PL-15, बहुत लंबी दूरी वाली PL-17, और हाल में रिपोर्ट हुई PL-16 जैसी अलग-अलग क्षमता वाली मिसाइलें हैं।
PL-15 — यह चीन की प्रमुख long-range BVR air-to-air missile है और इसे J-20, J-16 तथा J-10C जैसे fighters के साथ जोड़ा जाता है। इसकी reported range लगभग 200 km बताई जाती है, लेकिन वास्तविक combat range परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
PL-17 — यह इससे भी बड़े वर्ग की missile है। IISS के विश्लेषण में इसकी संभावित range लगभग 400 km आंकी गई है और इसे खासकर AWACS, tanker जैसे high-value aircraft को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया माना जाता है।
PL-16 — 2026 में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक चीन की PL-16 एक नई long-range AAM है, जिसमें extended range और दोबारा thrust देने की क्षमता जैसी विशेषताओं की चर्चा हुई है। लेकिन इसकी कई specifications अभी सार्वजनिक रूप से पुष्ट नहीं हैं।
उत्पादन इतनी तेजी से क्यों बढ़ा रहा ?
Reuters के मुताबिक, हाल के युद्धों ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के missile stocks पर दबाव डाला है। इसके बाद Pentagon तेजी से नए और बड़ी मात्रा में precision weapons हासिल करने पर जोर दे रहा है।
17 सितंबर के समझौते के तहत Lockheed Martin उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए खुद भी निवेश करेगा। कंपनी और अमेरिकी रक्षा विभाग का framework agreement आगे multiyear procurement contract की नींव रखता है। हालांकि इसके लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी।
उत्पादन योजना का मतलब–
| बिंदु | स्थिति |
| मिसाइल | AIM-260 JATM |
| नया समझौता | 17 सितंबर 2026 |
| उद्देश्य | उत्पादन और delivery तेज करना |
| Lockheed निवेश | उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए |
| Multi-year procurement | प्रस्तावित |
| Congressional approval | जरूरी |
| Missile range | Classified |
ऑस्ट्रेलिया भी इसे खरीदेगा ?
ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका में बनी ‘बियॉन्ड-विज़ुअल-रेंज’ एयर-टू-एयर AIM-260 जॉइंट एडवांस्ड टैक्टिकल मिसाइल (JATM) का पहला विदेशी खरीदार होगा। वह रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फ़ोर्स (RAAF) के लिए “450 तक” मिसाइलें खरीदने पर “लगभग” 736 मिलियन AUD (518 मिलियन USD) खर्च करेगा।
ऑस्ट्रेलिया के पास F-35A Lightning II और F/A-18F Super Hornet जैसे अमेरिकी लड़ाकू विमान हैं, इसलिए AIM-260 को उसके मौजूदा अमेरिकी-origin fighter ecosystem में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस संदर्भ में भारत कहां ?
भारत के लिए AIM-260 की खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय वायुसेना भी अपने indigenous air-to-air weapons ecosystem को तेजी से मजबूत कर रही है। भारत का Astra इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण है।
Astra एक indigenous Beyond Visual Range Air-to-Air Missile है। 2025 में DRDO और IAF ने Su-30MKI से indigenous RF seeker वाले Astra का सफल परीक्षण किया था और दो अलग परिस्थितियों में targets को सफलतापूर्वक engage किया गया।
सरकार के मौजूदा product record में Astra weapon system के लिए 80–110 km की range, active radar homing और Mach 4.5 की अधिकतम गति जैसी specifications दी गई हैं।
इसके अलावा Astra को Tejas के साथ भी सफलतापूर्वक integrate और test किया जा चुका है। 12 मार्च 2025 को Tejas LCA AF Mk1 prototype से Astra का परीक्षण हुआ था।








