ताइवान को अमेरिका से लंबे समय से प्रतीक्षित नए F-16V Block 70 लड़ाकू विमान मिलने की प्रक्रिया आखिरकार शुरू हो गई है। 66 F-16V Block 70 विमानों में से पहले दो विमान 17 अगस्त को अमेरिका से ताइवान के लिए रवाना हो चुके हैं। इनके जल्द ताइवान पहुंचने की उम्मीद है। यह डिलीवरी ऐसे समय हो रही है जब ताइवान और चीन के बीच सैन्य तनाव लगातार चर्चा में है।
अगस्त 2026 में ताइवान ने अपना सालाना Han Kuang सैन्य अभ्यास किया, जिसमें संभावित चीनी हमले, समुद्री नाकाबंदी, हवाई अड्डों पर हमले और कमांड एवं संचार व्यवस्था बाधित होने जैसी परिस्थितियों का अभ्यास किया गया। चीन ने इन अभ्यासों को ‘wasteful charade’ बताते हुए आलोचना की और ताइवान पर तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया।
66 F-16V का सौदा कितना बड़ा है?
ताइवान पहले से ही दुनिया के प्रमुख F-16 ऑपरेटरों में से एक है। उसने 1990 के दशक में अमेरिका से 150 F-16A/B ब्लॉक 20 फाइटर जेट खरीदे थे और बाद में अपने ज़्यादातर बेड़े को अपग्रेड करने का फ़ैसला किया। इस बीच ताइवान ने 2019 में अमेरिका से 66 नए F-16 Block 70/72 विमानों की खरीद का समझौता किया। सौदे की अनुमानित कीमत करीब 8 अरब डॉलर थी। विमान Lockheed Martin द्वारा बनाए जा रहे हैं। हालांकि, उत्पादन और सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्याओं के कारण डिलीवरी तय समय से पीछे चली गई।
- यह केवल एक नया स्क्वाड्रन जोड़ने की परियोजना नहीं है।
- ताइवान ने अपने पुराने F-16A/B बेड़े के 141 विमानों को भी F-16V स्तर पर अपग्रेड किया है।
- नए 66 विमान शामिल होने के बाद ताइवान का F-16 बेड़ा 200 से अधिक विमानों का हो जाएगा।
- इस तरह F-16 ताइवान की वायु रक्षा संरचना का केंद्रीय हिस्सा बनता जा रहा है।
50 साल पुराना विमान, मांग क्यों?
F-16 का मूल डिजाइन 1970 के दशक का है और इसका पहला उड़ान परीक्षण जनवरी 1974 में हुआ था। अमेरिकी वायुसेना की सेवा में 1978 में इंट्री हुई है। इस लिहाज से इसकी डिजाइन विरासत पांच दशक से भी अधिक पुरानी है। लेकिन इसकी मांग बनी हुई है। दरअसल यह प्लेटफ़ॉर्म देशों को एक आधुनिक मल्टीरोल फ़ाइटर देता है, जिसके लिए पूरे फ़्लीट में पांचवीं पीढ़ी के एयरक्राफ़्ट को ऑपरेट करने से जुड़ी लागत और इंफ़्रास्ट्रक्चर की ज़रूरतें नहीं होतीं। नए F-16 विमान खरीदने का ताइवान का फ़ैसला, इस विमान के साथ उसकी जान-पहचान और अपने आधुनिक फ़ाइटर बेड़े को बढ़ाने की ज़रूरत, दोनों को दिखाता है। फिर ताइवान को मिलने वाला F-16V उस पुराने विमान का साधारण संस्करण नहीं है।
- यह आधुनिक सेंसर, कंप्यूटर, रडार, संचार प्रणाली और हथियारों के साथ व्यापक रूप से आधुनिकीकृत चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है।
- F-16 की सबसे बड़ी ताकत है—पुराने एयरफ्रेम को नई तकनीक के साथ लगातार अपग्रेड करने की क्षमता।
- Block 70/72 में AN/APG-83 AESA रडार, आधुनिक एवियोनिक्स और विस्तारित संरचनात्मक जीवन शामिल है।
- नए विमान का एयरफ्रेम 12,000 उड़ान घंटों तक के संरचनात्मक जीवन के लिए डिजाइन किया गया है, जो पुराने उत्पादन F-16 की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि है।
- इसका अर्थ यह है कि विमान का मूल डिजाइन पुराना जरूर है, लेकिन उसकी लड़ाकू क्षमता को नई पीढ़ी के सेंसर और मिशन सिस्टम के जरिए लगातार बदला जा सकता है।
- इसी कारण F-16 आज भी कई देशों के लिए व्यावहारिक विकल्प बना हुआ है।
ग्लोबल सपोर्ट नेटवर्क भी F-16 के साथ
लॉकहीड मार्टिन का कहना है कि 29 देशों में लगभग 2,800 F-16 ऑपरेट होते हैं। इस बड़े यूज़र बेस ने मेंटेनेंस, स्पेयर पार्ट्स, ट्रेनिंग, हथियारों के इंटीग्रेशन और अपग्रेड के लिए एक बड़ा इकोसिस्टम बनाया है। यह एयरक्राफ्ट US और सहयोगी देशों के कई तरह के हथियारों और कम्युनिकेशन सिस्टम के साथ भी कम्पैटिबल है।
ताइवान के लिए AESA रडार क्यों महत्वपूर्ण है?
चीन की वायु शक्ति ताइवान की तुलना में कहीं बड़ी है। ऐसे माहौल में केवल लड़ाकू विमानों की संख्या पर्याप्त नहीं है; उन्हें ज्यादा दूरी से लक्ष्य पहचानने, ट्रैक करने और नेटवर्क में दूसरे प्लेटफॉर्म के साथ जानकारी साझा करने में सक्षम होना जरूरी है।
F-16V का APG-83 AESA रडार इसी दिशा में बड़ा सुधार है। यह पुराने mechanically scanned radar की तुलना में आधुनिक सेंसर क्षमता प्रदान करता है और विमान को आधुनिक हवाई युद्ध के लिए बेहतर तैयार करता है। Block 70 में आधुनिक मिशन कंप्यूटर, एवियोनिक्स और संचार प्रणालियां भी शामिल हैं।
ताइवान के लिए इसका एक अहम पहलू चीन के आधुनिक लड़ाकू विमानों, खासकर J-20 stealth fighter, के सामने अपनी पहचान और प्रतिक्रिया क्षमता को बेहतर बनाना है। ताइवान के अधिकारियों के अनुसार नए F-16V की प्रणालियों का परीक्षण इसी तरह की आधुनिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
सौदे का चीन तनाव से सीधा संबंध
ताइवान के F-16 कार्यक्रम को उसके व्यापक सुरक्षा संकट से अलग करके नहीं देखा जा सकता। बीजिंग, ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग से उसे चीन के साथ मिलाने की बात कह चुका है। ताइवान की सरकार चीन के संप्रभुता दावे को स्वीकार नहीं करती।
ताइवान के लिए F-16 इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि संभावित संघर्ष की स्थिति में वायु सेना को शुरुआती दौर में ही भारी दबाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में तेज प्रतिक्रिया, लंबी अवधि की सेवा क्षमता और आधुनिक सेंसर वाले विमान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अमेरिका के लिए भी F-16 केवल हथियार सौदा नहीं
ताइवान को F-16 की बिक्री अमेरिका-चीन रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का भी हिस्सा है। 1979 में अमेरिका ने बीजिंग के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए और ताइवान के साथ पुरानी Mutual Defense Treaty समाप्त हो गई। इसके बाद Taiwan Relations Act अमेरिकी नीति का महत्वपूर्ण आधार बना। इसके तहत अमेरिका ताइवान को रक्षात्मक हथियार उपलब्ध कराने और उसकी आत्मरक्षा क्षमता बनाए रखने की नीति अपनाता है।
- लेकिन अमेरिका ने ताइवान को लेकर स्पष्ट सैन्य गारंटी नहीं दी है। इसे लंबे समय से “strategic ambiguity” की नीति के रूप में देखा जाता है।
- इसलिए ताइवान को आधुनिक हथियार देना एक तरफ उसकी आत्मरक्षा क्षमता मजबूत करता है, वहीं दूसरी तरफ वाशिंगटन बीजिंग को यह संदेश भी देता है कि ताइवान पर बल प्रयोग की कीमत बढ़ सकती है।
- F-16 सौदे का यही रणनीतिक महत्व है। यह ताइवान की वायु शक्ति को बढ़ाने के साथ अमेरिका की Indo-Pacific रणनीति में भी उसकी भूमिका को मजबूत करता है।
- बीजिंग लंबे समय से अमेरिकी हथियार बिक्री का विरोध करता आया है। चीन का तर्क है कि अमेरिकी हथियार ताइवान की स्वतंत्रता समर्थक ताकतों को बढ़ावा देते हैं और “One-China” सिद्धांत के खिलाफ जाते हैं।
क्या F-16 चीन के खिलाफ शक्ति संतुलन बदल देगा?
तो इसका जवाब है, बिल्कुल नहीं। नए F-16V ताइवान की वायु रक्षा क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार करेंगे, लेकिन वे चीन के साथ पूरा सैन्य संतुलन बदलने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। चीन के पास बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान, लंबी दूरी की मिसाइलें, ड्रोन, वायु रक्षा प्रणालियां और व्यापक सैन्य औद्योगिक क्षमता है। इसलिए ताइवान की रणनीति केवल लड़ाकू विमानों पर निर्भर नहीं है। वह मिसाइल, ड्रोन, नौसेना, वायु रक्षा, मोबाइल हथियार प्रणालियों सहित युद्ध क्षमता को बढ़ा रहा है।
20 अगस्त 2026 को ताइवान ने रक्षा खर्च को 18 प्रतिशत बढ़ाकर रिकॉर्ड 1.1225 ट्रिलियन न्यू ताइवान डॉलर, यानी करीब 31.4 अरब डॉलर करने का प्रस्ताव रखा। इसमें ड्रोन, मिसाइल और अन्य सैन्य आधुनिकीकरण परियोजनाओं के लिए फंडिंग बढ़ाने की योजना है।








