वायुसेना को मिलेंगे 150 एडवांस्ड जेट ट्रेनर, फायटर पायलटों को आधुनिक युद्ध के हिसाब से ट्रेनिंग

By Defence Detective

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भारतीय वायु सेना (IAF) खुद को हर तरह से और मारक एवं सक्षम बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। वह आधुनिक पीढ़ी के फाइटर जेट्स से लेकर नई पीढ़ी के ट्रेनर जेट से लैस करने की तैयारी कर रही है। एक ओर वह छठी पीढ़ी के लडाकू विमान के प्रोजेक्ट से जुड़ने की कोशिश में लगी हुई तो दूसरी ओर फायटर पायलटों को आधुनिक युद्ध के मुताबिक ट्रेनिंग के लिए नेक्स्ट जेनरेशन जेट की ओर कदम बढ़ा दिया है।

भारतीय वायु सेना (IAF) ने अगली पीढ़ी के जेट ट्रेनर खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और ऐसे 150 विमानों के लिए टेंडर जारी किया है। ये IAF के हॉक Mk-132 एडवांस्ड जेट ट्रेनर्स की जगह लेंगे। ये विमान फाइटर पायलटों को आधुनिक हवाई युद्ध की मुश्किल चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे।

नए फाइटर की ज़रूरत सिर्फ़ एयरफ्रेम की उम्र से नहीं होती है। 2008 में हॉक के सर्विस में आने के बाद से लड़ाई का माहौल काफ़ी बदल गया है। मॉडर्न फाइटर नेटवर्क वाले सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, लंबी दूरी की मिसाइलों और तेज़ी से बेहतर होते डेटा लिंक पर निर्भर करते हैं। IAF अब चाहता है कि ये काबिलियत ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट में भी दिखे।

किसको और कैसे मिलेगा कॉन्ट्रैक्ट?

IAF ने ‘रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन’ (RFI) जारी किया है, जो टेंडर प्रक्रिया का पहला चरण है। नेक्स्ट जेनरेशन ट्रेनर जेट के लिए भारतीय और ग्लोबल मैन्युफैक्चरर RFI में बोली लगा सकते हैं। अगला चरण ‘रिक्वेस्ट फॉर प्रपोज़ल’ (RFP) होगा, जिसमें बोली लगाने वाले तय की गई ज़रूरतों के आधार पर टेक्निकल और कमर्शियल ऑफ़र जमा करेंगे। इस प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाने वाली विदेशी कंपनियों को यह दिखाना होगा कि वे कितना प्रोडक्शन, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन भारत में ला सकती हैं। RFI की मदद से सशस्त्र बल मैन्युफ़ैक्चरर्स से उपलब्ध प्लेटफ़ॉर्म, तकनीकी क्षमताओं, स्वदेशी कंटेंट, टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र और डिलीवरी शेड्यूल के बारे में जानकारी मांग सकते हैं।

  • हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) मुख्य भारतीय बोली लगाने वाली कंपनी है।
  • विदेशी दावेदारों में इटली की लियोनार्डो, कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज, बोइंग और रूस की याक (Yak) शामिल हो सकती हैं।
  • जो एयरक्राफ्ट टेक्निकल जांच में पास होंगे, उनका भारत में फील्ड ट्रायल होगा।
  • इसके बाद, सबसे कम कीमत वाली और टेक्निकल तौर पर सही बोली लगाने वाली कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया जाएगा।
  • RFI के जवाब की समय सीमा 5 अक्टूबर, 2026 है।

वायुसेना को कब तक मिलेंगे नेक्स्ट जेनरेशन जेट ट्रेनर ?

RFP के लिए संभावित समय दिसंबर 2027 तय किया गया है, और कॉन्ट्रैक्ट लागू होने की तारीख से 60 महीनों के अंदर डिलीवरी पूरी होनी है। अगर इस शेड्यूल का पालन भी किया जाता है, तो भी पहला एयरक्राफ़्ट 2030 के दशक के मध्य से पहले IAF के फ़्लाइंग ट्रेनिंग बेस तक पहुँचने की संभावना कम ही है। IAF को नए जेट ट्रेनर से हॉक के मुकाबले कहीं ज़्यादा उम्मीदें हैं।

  • RFI में फ्लाई-बाय-वायर कंट्रोल, कॉन्फ़िगर करने योग्य ‘हैंड्स-ऑन-थ्रॉटल-एंड-स्टिक’ कंट्रोल वाला ग्लास कॉकपिट, GPS और GLONASS के साथ स्वदेशी सैटेलाइट सिस्टम NavIC को जोड़ने वाले नेविगेशन की मांग।
  • एयरक्राफ्ट में ‘डिपार्चर’ (अचानक कंट्रोल खोने की स्थिति) से बचने की क्षमता होनी चाहिए।
  • अगर पायलट कंट्रोल छोड़ दे, तो यह अपने आप कंट्रोल्ड फ्लाइट में वापस आने में सक्षम होना चाहिए।

‘स्टेज-III’ ट्रेनर का क्या होता है रोल ?

RFI में बताया गया है कि ये विमान ‘स्टेज-III’ ट्रेनर होंगे। स्टेज-III  ट्रेनर, पायलटों के ऑपरेशनल फाइटर स्क्वाड्रन में जाने से पहले ट्रेनिंग चेन की आखिरी कड़ी होती है।  नए पायलटों को राफेल और तेजस जैसे फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स और आगे चलकर एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) उड़ाने के लिए तैयार करने से पहले, उन्हें ट्रेनर से एयरबोर्न रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और बियॉन्ड-विजुअल-रेंज मिसाइलों से परिचित कराया जाता है। नया स्टेज-III ट्रेनर, बेसिक फ़्लाइट ट्रेनिंग और सुखोई-30MKI, राफ़ेल और तेजस जैसे फ्रंटलाइन फ़ाइटर विमानों के बीच के अंतर को पाटने के लिए

अभी हॉक Mk-132 है वायुसेना का मुख्य स्टेज-III ट्रेनर

हॉक Mk-132 फरवरी 2008 में IAF (भारतीय वायु सेना) में शामिल हुआ और तब से यह मुख्य स्टेज-III ट्रेनर रहा है। ऑपरेशनल फाइटर जेट्स पर जाने से पहले पायलटों को एडवांस्ड फ्लाइंग और हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जाती है। इसलिए, पिछले लगभग दो दशकों से यह एयरक्राफ्ट IAF की फाइटर-पायलट ट्रेनिंग प्रक्रिया में एक अहम भूमिका निभा रहा है। IAF ने दो किश्तों में 106 हॉक Mk-132 एयरक्राफ्ट का कॉन्ट्रैक्ट किया था।

  • मार्च 2004 में हुए पहले कॉन्ट्रैक्ट में 66 एयरक्राफ्ट शामिल थे।
  • इनमें से 24 सीधे UK से सप्लाई किए गए थे और 42 HAL द्वारा लाइसेंस के तहत बनाए गए।
  • इसके बाद 2010 में HAL से 40 और एयरक्राफ्ट का कॉन्ट्रैक्ट किया गया।
  • ग्लोबल हॉक प्रोडक्शन लाइन भी बंद हो गई है।
  • UK, जो हॉक T1 और T2 एयरक्राफ्ट चलाता है, ने 7 अगस्त को उनके रिप्लेसमेंट के लिए एक RFI जारी किया।
  • ब्रिटेन बोइंग के T-7 ट्रेनिंग सिस्टम पर आधारित हॉक का अगला मॉडल ढूंढ रहा है।

आसान नहीं है इंडियन एयरफोर्स का फाइटर पायलट बनना

भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट बनने के लिए कई चरणों की ट्रेनिंग से गुज़रना पड़ता है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि अगर आपका चयन फाइटर पायलट प्रोग्राम में हो गया है तो आप सीधे फाइटर जेट्स उड़ाने लगेंगे। वहां तक पहुंचने के लिए आपको ट्रेनिंग के कई स्टेज पास करने होंगे। आपको समझाते हैं कि कैसे भारतीय वायुसेना फाइटर पायलट तैयार करती है। सबसे पहले प्राइमरी जेट पर ट्रेनिंग शुरू होती है, फिर इंटरमीडिएट जेट ट्रेनर और उसके बाद एडवांस्ड जेट ट्रेनर पर प्रशिक्षण होता है। तब जाकर ऑपरेशनल फाइटर जेट्स उड़ाने की बारी आती है।

1- Pilatus PC-7 Mk II — शुरुआत यहीं से। Pilatus Aircraft का PC-7 Mk II IAF की ab-initio यानी शुरुआती उड़ान ट्रेनिंग का प्रमुख विमान है। 2013 में इसे औपचारिक रूप से IAF में शामिल किया गया था। यहाँ ट्रेनी पायलट पहली बार military flying की बुनियादी चीजें सीखता है—take-off, landing, circuits, navigation, aerobatics इत्यादि।

2- HAL HJT-16 Kiran Mk-I/II-स्वदेशी Intermediate jet trainer है। इसके Mk-I और Mk-II variants ने लंबे समय तक pilot training में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसका काम Basic Trainer से Advanced Jet Trainer तक जाने के बीच का Stage-II training gap भरना है। लेकिन अब यह aging platform है और इसके replacement की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।

3- Hawk Mk-132 / भविष्य का नया Advanced Jet Trainer – यह सबसे महत्वपूर्ण jet trainer है, जो Stage-III/Advanced training में इस्तेमाल होता है। इससे ट्रेनिंग के बाद ऑपरेशन फाइटर जेट्स की बारी आती है।

आसान भाषा में समझें पूरी प्रक्रिया

बाधाओं से घिरा स्वदेशी ट्रेनर विमान प्रोग्राम

इस बीच, भारत के स्वदेशी ट्रेनर प्रोग्राम के क्षेत्र में लंबे डेवलपमेंट समय और सप्लाई-चेन की रुकावटें देखने को मिली हैं। HTT-40, HJT-36 यशस और HLFT-42, तीनों Hindustan Aeronautics Limited (HAL) के स्वदेशी ट्रेनर प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। किंन्तु इन्हें Production-ready operational success मानना अभी जल्दबाजी होगी।

HTT-40  बेसिक ट्रेनर विमान है। इसे डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने 2020 में 106 एयरक्राफ्ट के लिए मंज़ूरी दी थी और बाद में लगभग 6,800 करोड़ रुपये में 70 एयरक्राफ्ट का कॉन्ट्रैक्ट किया था, उसका पहला सीरीज़-प्रोडक्शन एयरक्राफ्ट बेंगलुरु से अक्टूबर 2025 में ही उड़ान भर पाया। यानी प्रोटोटाइप की पहली उड़ान के आठ साल बाद। इसके बाद इस प्रोग्राम को हनीवेल TPE331-12B इंजन की सप्लाई में देरी का सामना करना

इंटरमीडिएट ट्रेनिंग स्टेज पर, HJT-36 (जिसे एयरो इंडिया 2025 में ‘यशस’ नाम दिया गया) लगभग दो दशकों से डेवलप हो रहा है और इसकी हैंडलिंग खूबियों को बेहतर बनाने के लिए इस पर काफी काम किया गया है। लेकिन अंतिम रूप से अभी तक सेवा में नहीं आ सका है।

HAL का प्रस्तावित सुपरसोनिक HLFT-42, जिसे एयरो इंडिया 2023 में एक स्केल मॉडल के तौर पर दिखाया गया था और जिसे हॉक की जगह लेने वाले संभावित एयरक्राफ्ट के तौर पर पेश किया गया था, वह अभी तक ‘क्रिटिकल डिज़ाइन रिव्यू’ स्टेज तक नहीं पहुंचा है।

सरल तरीके से समझें

HTT-40 → HJT-36 → HLFT-42

Basic training → Intermediate jet training → Advanced fighter/LIFT training

यानी भारत एक ऐसी स्वदेशी training ecosystem बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है जिसमें पायलट को शुरुआती उड़ान से लेकर frontline fighter में जाने से पहले के उन्नत प्रशिक्षण तक भारतीय प्लेटफॉर्म मिल सकें। लेकिन कुल मिलाकर इनके लिए अभी भी हमें इंतजार ही करना है।

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