रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित Hindustan Shipyard Limited (HSL) में भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी Fleet Support Ship (FSS-1) को लॉन्च किया। इसका नाम ‘Surya’ रखा गया है। इसका मुख्य काम समुद्र में तैनात युद्धपोतों को लगातार लॉजिस्टिक सपोर्ट देना है।
इस जहाज का स्टील कटिंग समारोह 10 अप्रैल 2024 को हुआ था और खास बात यह है कि स्टील कटिंग के करीब 18 महीने बाद यह समुद्र में उतार दिया गया। कभी इस प्रोजेक्ट में तुर्की की कंपनी को तकनीकी सहयोगी बनाने की योजना थी, लेकिन अंत में सरकार ने इसे विदेशी कंपनी की भागीदारी के बिना स्वदेशी उद्योग के जरिए आगे बढ़ाने का फैसला किया।
राजनाथ सिंह ने इस मौके पर पांचवें फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS-5) की कील रखी और अपग्रेड किए गए स्लिपवे-4 और 300-टन वाले गोलियथ क्रेन का उद्घाटन भी किया। यह उपलब्धि HSL की बड़े और ज़्यादा जटिल जहाज़ बनाने की क्षमता को मज़बूत करने और भारत की स्वदेशी समुद्री क्षमता को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।

‘FSS-1 का लॉन्च कामयाबी का प्रतीक है, FSS-5 की कील रखना संकल्प का प्रतीक है और नया स्लिपवे हमारी बढ़ती क्षमता का प्रतीक है। HSL न केवल अपनी जहाज़ बनाने की क्षमता को मज़बूत कर रहा है, बल्कि भारत की समुद्री ताकत की नींव को भी मज़बूत कर रहा है।
Rajnath Singh, Defence minister
‘सूर्य’ आखिर करेगा क्या-क्या?
इस Fleet Support Ship को आसान भाषा में चलता-फिरता समुद्री सप्लाई बेस समझ सकते हैं। जब भारतीय नौसेना का कोई युद्धपोत हिंद महासागर के दूर-दराज इलाके में कई हफ्तों या महीनों तक ऑपरेशन कर रहा होता है, तो उसके सामने ईंधन, पानी, भोजन, स्पेयर पार्ट्स और दूसरे सामान की जरूरत लगातार बनी रहती है।
ऐसे समय में Surya जैसे जहाज समुद्र में ही उसके पास पहुंचकर सप्लाई कर सकते हैं। Surya एक साथ बड़ी मात्रा में ईंधन, पानी, रसद और दूसरे जरूरी सामान को समुद्र में ले जाकर युद्धपोतों तक पहुंचा सकता है। यानी नौसेना के बड़े युद्धपोतों को हर बार ईंधन, पानी या जरूरी सामान लेने के लिए बंदरगाह लौटना नहीं पड़ेगा।
इसकी स्पेसीफिकेशन-
| क्षमता | जानकारी |
| जहाज | FSS-1 Surya |
| निर्माता | Hindustan Shipyard Limited |
| वजन/डिस्प्लेसमेंट | लगभग 43,500 टन |
| लंबाई | लगभग 223.6 मीटर |
| चौड़ाई | लगभग 31.5 मीटर |
| अधिकतम गति | करीब 20 नॉट |
| स्वदेशी सामग्री | लगभग 82% |
| मिशन एंड्योरेंस | करीब 60 दिन |
| डीजल क्षमता | करीब 20,000 टन |
| एविएशन टर्बाइन फ्यूल | करीब 2,500 टन |
| ताजा पानी | करीब 1,000 टन |
‘सूर्य’ की बड़ी खासियतें ?
Surya की सबसे बड़ी उपयोगिता यही है कि यह केवल एक जहाज में ईंधन भरने वाला टैंकर नहीं है। Fleet Support Ship को इस तरह तैयार किया गया है कि समुद्र में मौजूद कई युद्धपोतों को सपोर्ट दिया जा सके। यानी यह एक साथ कई युद्धपोतों को सपोर्ट करेगा।
इसमें at-sea replenishment की सुविधा है, जिसके जरिए जहाजों को समुद्र में ही ईंधन और दूसरी आवश्यक सामग्री दी जा सकती है। At-sea replenishment का मतलब है समुद्र में तैनात युद्धपोतों को वहीं ईंधन, पानी और जरूरी सामान की आपूर्ति करना, ताकि उन्हें सप्लाई लेने के लिए बार-बार बंदरगाह न लौटना पड़े।
- इसमें फर्स्ट-लाइन मेंटेनेंस और इमरजेंसी रिपेयर के लिए वर्कशॉप भी हैं। यानी जरूरत पड़ने पर समुद्र में तैनात दूसरे नौसैनिक प्लेटफॉर्म के लिए शुरुआती स्तर की मरम्मत सहायता भी मिल सकती है।
- जहाज पर Multi-Role Helicopter operations के लिए हेलीकॉप्टर डेक भी दिया गया है।
- इसके अलावा इसमें आत्मरक्षा के लिए सिस्टम मौजूद होंगे, ताकि यह खुद भी ऑपरेशन के दौरान सुरक्षित रह सके।
प्रोजेक्ट में तुर्की की एंट्री कब हुई थी ?
इस प्रोजेक्ट की कहानी का एक बेहद अहम हिस्सा तुर्किये से जुड़ा है। Fleet Support Ships बनाने की शुरुआती योजना में तुर्किये की Anadolu Shipyard और TAIS consortium को तकनीकी सहयोगी के रूप में चुना गया था। 2019 में Anadolu Shipyard को HSL के साथ सहयोगी के तौर पर चुने जाने की खबर सामने आई थी।
- 20 मार्च 2020 को HSL और Anadolu के बीच पांच Fleet Support Ships के लिए डिजाइन, प्रमुख उपकरणों की सप्लाई, तकनीकी सहायता और परियोजना कार्यान्वयन से संबंधित सहयोग समझौता भी हुआ था।
- लेकिन इसके बाद भारत-तुर्की संबंधों और तुर्की के पाकिस्तान के साथ रक्षा एवं राजनीतिक सहयोग को लेकर चिंताएं सामने आईं।
- 16 अगस्त 2023 को CCS ने फैसला किया कि FSS प्रोजेक्ट को Anadolu की भागीदारी के बिना स्वदेशी उद्योग के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा।
- इसके बाद 23 अगस्त 2023 को रक्षा मंत्रालय ने HSL को तुर्की कंपनी के साथ सहयोग समझौता समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया
- और 24 अगस्त 2023 को सहयोग समझौता समाप्त कर दिया गया।
कब का और कितने का है यह प्रोजेक्ट ?
Surya अकेला जहाज नहीं है। भारतीय नौसेना के लिए कुल पांच Fleet Support Ships बनाए जा रहे हैं। अगस्त 2023 में रक्षा मंत्रालय ने HSL के साथ पांच FSS के लिए करीब ₹19,000 करोड़ का contract किया था।
- इन जहाजों का उद्देश्य भारतीय नौसेना की Blue Water क्षमता को मजबूत करना है।
- प्रोजेक्ट में HSL ने देश की अलग-अलग शिपबिल्डिंग क्षमताओं का भी इस्तेमाल किया है।
- दो जहाजों के निर्माण का काम L&T Shipyard, Kattupalli को दिया गया है।
- इसका मकसद देश की उपलब्ध जहाज निर्माण क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करते हुए समयसीमा पूरी करना है।
- 6 अक्टूबर को राजनाथ सिंह ने FSS-5 की कील भी रखी, जिससे पांच जहाजों की पूरी श्रृंखला आगे बढ़ने का संकेत मिला।
हिंद महासागर में भारत की ‘रीच’ क्यों बढ़ेगी, Fleet Support Ship क्यों महत्वपूर्ण ?
भारतीय नौसेना की असली ताकत केवल उसके विध्वंसक, फ्रिगेट, विमानवाहक पोत या पनडुब्बियां नहीं हैं। किसी भी Blue Water Navy के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
अगर कोई युद्धपोत लगातार कई सप्ताह हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी या उससे आगे तैनात है, तो उसे ईंधन और सप्लाई की जरूरत होगी। यहीं Fleet Support Ship रणनीतिक भूमिका निभाता है।
FSS नौसेना की reach, endurance और operational effectiveness बढ़ाएंगे। दूसरे शब्दों में, भारतीय युद्धपोत ज्यादा समय तक समुद्र में रह सकेंगे और उन्हें बार-बार बंदरगाह लौटने की जरूरत कम होगी।
यह क्षमता हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री निगरानी, लंबी दूरी की तैनाती और संभावित संकट के समय प्रतिक्रिया क्षमता के लिए खास महत्व रखती है।
HSL को भी मिला बड़ा अपग्रेड
नया स्लिपवे और भारी क्षमता वाला क्रेन HSL को करीब 45,000 DWT तक के जहाज बनाने और लॉन्च करने की क्षमता देता है। Goliath Crane में आधुनिक नियंत्रण और मॉनिटरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे बड़े जहाजों के भारी ब्लॉक को अधिक तेजी और सटीकता से संभालना संभव होगा।
- यानी सरकार केवल Surya बनाने पर नहीं रुक रही, बल्कि भारत में बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म बनाने का औद्योगिक आधार भी मजबूत कर रही है।
- Surya का लॉन्च भारत के लिए एक बड़ा संदेश है। अब लक्ष्य केवल विदेशी जहाज खरीदना या विदेशी तकनीक पर निर्भर रहना नहीं है।
भारतीय नौसेना के पास पहले से 4 बड़े replenishment/fleet tanker जहाज हैं:–
| जहाज | क्लास | भूमिका |
|---|---|---|
| INS Deepak (A50) | Deepak-class | ईंधन, पानी और लॉजिस्टिक सपोर्ट |
| INS Shakti (A57) | Deepak-class | समुद्र में replenishment |
| INS Jyoti (A58) | Jyoti-class | Fleet tanker/replenishment |
| INS Aditya (A59) | Aditya-class | Fleet tanker/replenishment |








