अमेरिका ने ऑफर किया AWACS वाला MQ-9B

By Alok Ranjan

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  • एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग वाला स्ट्राइक ड्रोन
  • Long Range Airborne Surveillance की क्षमता
  • परंपरागत एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग से बेहद सस्ता

क्या है अमेरिका का ऑफर ?

एक ऐसा UAV जो AEW&C से लैस है…..एक ऐसा स्ट्राइक ड्रोन जो Airborne Early Warning रडार से दुश्मन के एयरक्राफ्ट और मिसाइलों पर निगरानी करेगा….एक ऐसा UAV जो एयरबोर्न अर्ली वार्निंग के क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित होगा….और सबसे गजब की बात ये कि अभी ये एडवांस UAV सर्विस में भी नहीं आया है और ख़बर आ रही है कि इसे भारत को ऑफर करने की तैयारी हो चुकी है।MQ9B ड्रोन को बनाने वाली अमेरिकन कंपनी General Atomics के ग्लोबल चीफ एक्ज़िक्यूटिव विवेक लाल ने इस बात की पुष्टि की है।…द इकॉनमिक टाइम्स की इस रिपोर्ट को देखिये। 23 फरवरी को पब्लिश हुई इस रिपोर्ट के मुताबिक जनरल एटॉमिक्स के चीफ एग्जीक्यूटिव विवेक लाल ने कहा कि वे एयरबोर्न अर्ली वार्निंग के साथ MQ9B UAVs देने के लिए तैयार हैं।ये ऑफर भारत के लिए बहुत बड़ा है। भारत ने 2024 में अमेरिका के साथ MQ-9B ड्रोन खरीदने की डील की थी। 3.5 बिलियन डॉलर की इस डील में 31 MQ-9B ड्रोन खरीदे जा रहे हैं।इनमें से 15 SeaGuardian Drone होंगे जो नेवी को मिलेंगे जबकि एयरफोर्स और आर्मी को 8-8 SkyGuardian ड्रोन मिलेंगे। उम्मीद है कि इसकी डिलीवरी 2029 से 30 के बीच हो जाएगी।

MQ-9B की खूबियां

ये रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम हैं जिनकी इस्तेमाल इंटेलिजेंस, सर्विलांस और Reconnaissance के लिए किया जाता है।स्काईगार्डियन, सैटेलाइट से जुड़ा होता है और ये हर तरह के मौसम के साथ-साथ, रात हो या दिन, 40+ घंटे तक की उड़ान भर सकता है और रियल-टाइम सिचुएशनल अवेयरनेस दे सकता है। पिछले साल 17 जून को General Atomics ने AEW से लैस MQ9B का एक वीडियो भी रिलीज किया था। इसके दोनों विंग्स के नीचे Airborne Early Warning रडार लगाये गये हैं।ये एयरक्राफ्ट की पूरी फ्लाइट के दौरान एक्टिव रहते हैं और Long Range Airborne Surveillance मुहैया करते हैं। वाइड रेंज की वजह से दुश्मन के एयरक्राफ्ट से लेकर मिसाइल तक को ये आसानी से ट्रेस एंड ट्रैक कर लेते हैं।दुनिया में ये पहली बार हो रहा है कि एक Airborne Early Warning सिस्टम किसी अनमैन्ड एयरक्राफ्ट पर लगाया जा रहा है।

Technical Specifications

इस एयरक्राफ्ट में रेवोल्यूशनरी लिंक्स मल्टी-मोड रडार, एक एडवांस्ड इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इंफ्रारेड सेंसर, ऑटोमैटिक टेकऑफ़ और लैंडिंग फेसेलिटी है। इस ड्रोन की खासियत ये है कि ये केवल ISR के लिए इस्तेमाल नहीं होता बल्कि इसके पास दुश्मन के ठिकानों पर स्ट्राइक करने की भी जबरदस्त क्षमता है। MQ-9B में 9 हार्ड पॉइन्ट्स हैं जिसमें 2155 किलोग्राम तक के पेलोड कैरी किये जा सकते हैं।वहीं SeaGuardian एंटी सबमरीन वारफेयर सिस्टम से लैस है। SeaGuardian, Sonobuoys डिस्पेन्डिंग सिस्टम समुद्र में ड्रॉप करता है जो सबमरीन को डिटेक्ट और ट्रैक करता है….लेकिन अब जिस ड्रोन के ऑफर की बात की जा रही है वो इससे भी बड़ा और जबरदस्त होगा क्योंकि ये MQ9B आर्म्ड ड्रोन एयरबोर्न अर्ली वार्निंग की क्षमता से भी लैस होगा। देखिये जेनरल एटॉमिक्स ने पिछले साल 15 जून को एक प्रेस रिलीज जारी कर ये बताया था कि General Atomics Aeronautical Systems और स्विडिश एयरोस्पेस एंड डिफेंस कंपनी Saab के साथ एक पार्टनशिप करने जा रहा है जिसके ज़रिये General Atomics अपने MQ-9B रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट को एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल कैपेबिलिटी से लैस करने वाला है। इस प्रोजेक्ट में MQ-9B SkyGuardian, MQ-9B SeaGuardian, United Kingdom का Protector और अभी डेवलपमेंटल फेज में चल रहा MQ-9B STOL भी शामिल है।इस प्रोजेक्ट को 2026 में यानी इसी साल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।ठीक ऐसी ही प्रेस रिलीज़ SAAB ने भी जारी की थी।उस समय GA-ASI के प्रेसिडेंट डेविड आर अलेक्जेंडर ने कहा था-

कीमत कितनी ?

अभी MQ9B STOL जिसे AEW&C से लैस किया जा रहा है उसकी पर यूनिट कॉस्ट करीब-करीब 200 Million डॉलर है।वहीं अगर बात Manned AEW&C Aircrafts की करें तो Boeing E-7 Wedgetail AEW&C की पर यूनिट कॉस्ट करीब 724 मिलियन डॉलर की है।इज़रायल से भारत ने 2004 में Phalcon AWACS ख़रीदा था। तब उसकी पर यूनिट कॉस्ट करीब 500 मिलियन पड़ी थी। यहां तक कि भारत के अपने बनाये हुए Netra Mk2 AWACS की पर यूनिट कॉस्ट भी 400 मिलियन के करीब है।मैंने इसे Airborne Early Warning सिस्टम के क्षेत्र में क्रांतिकारी बताया था, उसकी वजह भी यही है। ये Airborne Early Warning का एक Low Cost Solution है।

भारत के लिए फायदा या नुकसान ?

आपको मैंने दुनिया के टॉप Airborne Early Warning सिस्टम्स से इस अनमैन्ड Airborne Early Warning की कॉस्ट का कंपैरिजन दिखा दिया। इतना ही नहीं इस अनमैन्ड Airborne Early Warning ड्रोन का ऑपरेटिंग कॉस्ट भी मैन्ड AEW&C एयरक्राफ्ट से काफी कम है। बताया जाता है कि AEW&C सिस्टम से लैस MQ-9B की ऑपरेटिंग कॉस्ट 5 से 6,000 डॉलर प्रति घंटा होगी, जबकि कन्वेशन्शनल यानी मैन्ड AEW&C एयरक्राफ्ट की ऑपरेटिंग कॉस्ट 40 से 60 हजार डॉलर प्रति घंटे की है। भई होगा क्यों नहीं। ये Airborne Early Warning एक ड्रोन में सेट किया गया है जो लगातार 40 घंटे तक रिमोटली उड़ सकता है वहीं पारंपरिक Airborne Early Warning सिस्टम में एक बड़ा एयरक्राफ्ट इस्तेमाल किया जाता है जिसमें कम से कम 5 क्रू मेंबर्स भी होते हैं। इसमें काफी फ्यूल भी खर्च होता है, इसी वजह से इसकी ऑपरेशनल कॉस्ट अधिक है।जंग के हालात में इसे दुश्मन के हमले से बचाना भी बड़ी चुनौती होती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने 350 किलोमीटर दूर उड़ रहे पाकिस्तान के एक Airborne Early Warning को मार गिराया था। ये पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा झटका था। भारत भी अब तक Aircraft Based Airborne Early Warning Systems इस्तेमाल कर रहा है लेकिन अगर अमेरिका इस Airborne Early Warning से लैस ड्रोन को भारत को बेचता है तो निश्चित तौर पर भारत की एयर सुपिरियरिटी बहुत बढ़ जाएगी।

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