- NIA ने 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी को गिरफ्तार किया
- पूर्वोत्तर राज्यों में अस्थिरता फैलाने की कोशिश का आरोप
- यूक्रेन का आरोप पॉलिटिकल मोटिवेटेड है गिरफ्तारी
- अमेरिकी राजदूत NSA अजित डोवल से मिले
यूक्रेन का पारा गर्म क्यों है ?
भारत में 6 यूक्रेनियन की गिरफ़्तारी से यूक्रेन बौखला गया है। वो भारत पर अनाप-शनाप आरोप लगा रहा है। इन गिरफ़्तारियों को पॉलिटिकल मोटिवेटेड बता रहा है। दरअसल NIA ने 13 मार्च को लखनऊ और दिल्ली एयरपोर्ट से 3-3 यूक्रेनियों को गिरफ़्तार किया था। Hurba Petro, Slyviak Taras और Ivan Sukmanovskyi को लखनऊ एयरपोर्ट से पकड़ा गया था।जबकि Kaminskyi Viktor, Honcharuk Maksim और Stefankiv को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। इनके अलावा कोलकाता से एक अमेरिकी स्पाई मैथ्यू की अरेस्ट हुआ है। इन सभी पर भारत के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार जाने, म्यांमार की बागियों को ड्रोन वारफेयर की ट्रेनिंग देने, यूरोप से अवैध रूप से ड्रोन मंगवा कर मणिपुर और म्यांमार तक पहुंचाने के आरोप लगे हैं।
यूक्रेन से लेकर अमेरिका तक में खलबली
भारत में हुई इन 6 यूक्रेनियों की गिरफ्तारी ने कीव से लेकर वाशिंगटन तक में खलबली मचा दी। NIA ने गिरफ्तारी के दूसरे ही दिन इस सातों को कोर्ट में पेश कर दिया था। इनकी दूसरी पेशी 17 मार्च को हुई, और कोर्ट ने इन्हें 11 दिन की और NIA रिमांड में भेज दिया था।NIA इन सभी से पूछताछ कर इन पर लगे आरोपों की छानबीन में जुटी है। ड्रोन वारफेयर की ट्रेनिंग, ड्रोन सप्लाई और म्यांमार तक जाने के रास्तों की पड़ताल कर रही है। दूसरी तरफ यूक्रेन ने इन गिरफ़्तारियों के विरोध में भारत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।यूक्रेन आरोप लगा रहा है कि ये गिरफ़्तारी पॉलिटिकल मोटिवेटेड है। यूक्रेन ने पहले तो अपने इन 6 नागरिकों को तुरंत छोड़े जाने की मांग की। इसके बाद यूक्रेन ने इन सभी गिरफ़्तार किये गये यूक्रेनियन के लिए काउंसुलर एक्सेस की डिमांड की।
यूक्रेन की एंबेसी ने क्या कहा है ?
19 मार्च को यूक्रेन की दिल्ली एंबेसी ने एक प्रेस रिलीज जारी किया है। इस प्रेस रिलीज में दावा किया गया है कि NIA की गिरफ़्त में आए उसके नागरिक किसी तरह की अवैध गतिविधि में शामिल नहीं थे और उनकी गिरफ़्तारी ग़लत है।
“यूक्रेन के छह नागरिकों को हिरासत में लेने के मामले में पब्लिक में मौजूद जानकारी को ध्यान में रखते हुए, जिसमें मीडिया रिपोर्ट्स भी शामिल हैं, जिनसे पता चलता है कि यह कार्रवाई रूसी पक्ष की दी गई जानकारी की वजह से शुरू हुई थी। भारत गणराज्य में यूक्रेन की एम्बेसी ने उन हालातों को लेकर गंभीर चिंता जताई है जो इस मामले के शायद सोचे-समझे और राजनीति से प्रेरित होने की ओर इशारा करते हैं, जैसा कि इस स्टेज पर मौजूद तथ्यों से पता चलता है।”
“आतंकवाद से जुड़े किसी भी आरोप पर सिर्फ़ वेरिफाइड फैक्ट्स, ट्रांसपेरेंट प्रोसेस और पूरे इंटरगवर्नमेंटल कोऑपरेशन के आधार पर ही विचार किया जाना चाहिए। यूक्रेन इस मामले की जांच में ऑब्जेक्टिविटी, ट्रांसपेरेंसी और इम्पार्शियलिटी पक्का करने की ज़रूरत पर ज़ोर देता है। हम इस बात पर भी ज़ोर देते हैं कि यूक्रेन की ऐसी किसी भी एक्टिविटी में कोई दिलचस्पी नहीं है जिससे भारत की सिक्योरिटी को खतरा हो।”
“यूक्रेन लगातार एक असरदार और दोस्ताना देश के तौर पर भारत के साथ सिक्योरिटी, भरोसा और सहयोग को मज़बूत करने की वकालत करता है। इसके बजाय, रूस, एक हमलावर देश के तौर पर, हर हाल में यूक्रेन और भारत के बीच दरार डालने की कोशिश करता है। इस मामले का इस्तेमाल यूक्रेन को बदनाम करने या यूक्रेन-भारत रिश्तों में अविश्वास पैदा करने की कोई भी कोशिश, दोनों देशों के बीच पार्टनरशिप को नुकसान पहुंचाने की जानबूझकर की गई कोशिश लगती है।”
यूक्रेन ने अपनी इस प्रेस रिलीज़ में PM मोदी की यूक्रेन यात्रा और यूक्रेन-भारत के बीच हुए आतंकवाद से लड़ने की आपसी सहमति का भी जिक्र किया है। ये भी लिखा है कि उसके नागरिकों के साथ अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से बर्ताव किया जाएगा। उन्हें कानूनी मदद दी जाएगी।
क्या रूसी खुफिया एजेंसी ने की मदद ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हो सकता है कि NIA को टिप रूस से मिली हो? ये पहले भी होता रहा है। एक देश की एजेंसी दूसरे देश की एजेंसी को इस तरह की टिप दिया करती है। रूस और यूक्रेन के बीच 4 साल से भी लंबे समय से जंग चल रही है और दोनों देशों के स्पाई नेटवर्क एक दूसरे के खिलाफ जमकर इस्तेमाल किये जा रहे हैं। इस बीच 14 यूक्रेनी लोगों का टूरिस्ट वीज़ा पर अलग-अलग भारत आना, फिर सभी का गुवाहाटी जाना, सवाल तो खड़े करता है ना।इन सभी पर मिज़ोरम के उन इलाकों में भी जाने का आरोप है जहां भारतीयों को भी जाने के लिए स्पेशल परमिट लेना पड़ता है। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू पर भी मिजोरम में घुसपैठ के आरोप हैं।तो पहला क्राइम तो यही हो गया। अब NIA के मुताबिक मैथ्यू के साथ मिलकर ये सभी 6 यूक्रेनियन मिजोरम के रास्ते म्यांमार गये थे और वहां आतंकवादियों को ड्रोन वारफेयर की ट्रेनिंग दी है। ड्रोन की तस्करी और ड्रोन सप्लाई भी की है।
कौन है CIA एजेंट मैथ्यू ?
कोलकाता में मैथ्यू की गिरफ़्तारी से हलचल तो अमेरिका में भी मची है। अब तक जो रिपोर्ट्स आई हैं उसके हिसाब से मैथ्यू एक CIA एजेंट है। लीबिया, सीरिया, ईरान समेत वो कई देशों में कोवर्ट ऑपरेशन्स में शामिल रह चुका है। उसने खुद बताया था कि लीबिया में उसे गिरफ़्तार भी कर लिया गया था। हफपोस्ट में 10 अगस्त 2011 को छपे एक आर्टिकल के मुताबिक अमेरिका में मैरीलैंड के रहने वाले मैथ्यू को लीबिया में पकड़ लिया गया है। 6 महीने लीबिया की जेल में रहने के बाद उसे छोड़ा गया था और उसके कुछ ही महीनों बाद वो सीरिया में जंग के फ्रंटलाइन पर मौजूद था। यही नहीं मैथ्यू ने यूक्रेन की आर्मी के लिए एंटी ड्रोन सिस्टम बनाया है। वो पिछले कई सालों से वार और ड्रोन वारफेयर की ट्रेनिंग भी दे रहा है।
अमेरिकी राजदूत की NSA डोवल से मुलाकात
अमेरिका को भी पता है कि भारत के हाथ कुछ बड़ा लग गया है, तभी उसने सार्वजनिक रूप से तो अब तक कोई खास बयान नहीं दिया है लेकिन 18 मार्च को अमेरिका के भारत में अंबेसेडर सर्जियो गोर ने भारत के NSA अजित डोभाल से मुलाकात की है। अब सर्जियो गोर ने बातचीत के मुद्दों की डिटेल तो नहीं बतायी लेकिन कयास लगाये जा रहे हैं कि दोनों के बीच हुई इस बातचीत में मैथ्यू की गिरफ़्तारी की भी चर्चा हुई होगी। यानी अमेरिका फूंक-फूंक कर क़दम उठा रहा है।
अमेरिका पर प्रेशर बढ़ रहा है
भई अमेरिका ने भी आतंकवाद के मामले में भारतीय निखिल गुप्ता को जेल में डाला हुआ है। अब अगर मैथ्यू के खिलाफ भारत के पास पुख्ता सबूत हैं तो फिर केवल मैथ्यू नहीं बल्कि अमेरिका मुश्किल में पड़ सकता है। इसलिए यूक्रेन को भी सब्र से काम लेना चाहिए। यूक्रेन को भारत और रूस की दोस्ती सालों से खटकती है। भारत पर वो जंग को फ्यूल करने के आरोप भी लगा चुका है लेकिन अब भारत में इन 6 यूक्रेनियों की गिरफ़्तारी के बाद उसकी गर्दन भी फंस चुकी है। अगर इन लोगों पर लगे आरोप साबित हो जाते हैं तो यूक्रेन की भी भारी फजीहत होने वाली है, इसलिए बेहतर यही है कि उसे जांच में भारतीय एजेंसियों की मदद करनी चाहिए, ना कि इसे रूस की साज़िश करार देकर भारत पर ही उंगली उठानी चाहिए।







