तुर्की-अज़रबैजान पर हुई स्ट्राइक, क्या अगला नंबर पाकिस्तान का ?

By Alok Ranjan

Published On:

Date:

pakistan tuekey azerbaijan nexus

क्या अज़रबैजान पर ईरान ने की ड्रोन स्ट्राइक ?

अमेरिका और इज़रायल पिछले एक हफ्ते से लगातार ईरान पर जबरदस्त बमबारी कर रहे हैं, तो ईरान भी इज़रायल समेत पूरे मीडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी बेसेज़ को दहला रहा है। लेकिन अब इस लड़ाई के और व्यापक होने का ख़तरा मंडरा रहा है और उसकी वजह है एक ड्रोन स्ट्राइक। ये ड्रोन अटैक ना तो ईरान में हुआ है, ना इज़रायल में, ना UAE, बहरीन और कुवैत में। ये हमला हुआ है अज़रबैजान में।गुरुवार यानी 5 मार्च को अजरबैजान में दो ड्रोन स्ट्राइक हुए। एक ड्रोन Nakhchivan International Airport के कैंपस में आकर गिरा तो दूसरा एयरपोर्ट के पास एक स्कूल पर। दावा किया जा रहा है कि अजरबैजान पर ये ड्रोन स्ट्राइक ईरान ने की है। अजरबैजान गर्वमेंट ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि ये ड्रोन ईरान ने ही दागे थे। इस ड्रोन स्ट्राइक में दो लोग घायल हुए हैं। अज़रबैजान पर ड्रोन हमले ने मीडिल ईस्ट के इस संकट को काकेशस रीज़न तक फैला दिया है यानी इस लड़ाई के और फैलने के आसार बढ़ गये हैं।अपने ऊपर की गई इस ड्रोन स्ट्राइक से अजरबैजान बहुत भड़का हुआ है। उसने ईरानी राजदूत को बुलाकर अपनी नाराज़गी तो जताई ही है, साथ-साथ हमले का जवाब देने की भी बात कही है। अब अगर अजरबैजान, ईरान पर पलटवार करता है तो ज़ाहिर है कि फिर ईरान भी उसका जवाब देगा और इससे इस जंग में एक नया मोर्चा खुल जाएगा।हालांकि ईरान की आर्म्ड फोर्स ने अजरबैजान पर ड्रोन हमला करने की बात से इनकार किया है। अब सवाल उठता है कि ईरान ने अगर अजरबैजान पर हमला किया है तो उसकी वजह क्या है, और नहीं किया तो सवाल ये कि फिर अजरबैजान पर स्ट्राइक की तो किसने की।

तुर्की पर भी हुआ था बैलिस्टिक मिसाइल से हमला

अजरबैजान से पहले एक हमला तुर्की पर भी किया गया था। तुर्की के एयरस्पेस की तरफ बढ़ रही ईरान की बैलेस्टिक मिसाइल्स को NATO की एयर डिफेंस ने इंटरसेप्ट कर लिया था। ये अपने आप में बहुत बड़ी ख़बर थी क्योंकि ईरान का ये किसी नाटो कंट्री पर किया गया पहला हमला था। ईरान ने अब तक मीडिल ईस्ट में मौजूद अरेबियन देशों को टारगेट बनाया है, वो भी इसलिए क्योंकि उन देशों में अमेरिका के मिलिट्री बेसेज़ हैं। लेकिन इस जंग में ईरान के खिलाफ अब तक केवल अमेरिका और इज़रायल ही है, UK और फ्रांस ने इस लड़ाई से दूरी बना ली है। NATO के दूसरे सदस्य देशों ने भी जंग लड़ने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है लेकिन तुर्की पर किया गया ईरान का हमला इस पूरे सिनैरियो को पलट सकता है। तुर्की एक NATO कंट्री है।और यहां के Incirlik air base में NATO फोर्स तैनात है, जिसमें अमेरिका का अच्छा खासा असेट है। वहीं Kurecik में रडार बेस भी है। ये अमेरिकी रडार बेस खास तौर पर ईरान की मिसाइलों को ट्रैक करने के लिए तैयार किया गया है…इस रडार का सीधा फायदा इज़रायल को होता है और 2025 में इसके खिलाफ लोगों ने तुर्की में प्रोटेस्ट भी किया था। तो दावा किया गया कि ईरान ने तुर्की के Incirlik air base को निशाना बनाने के लिए मिसाइल दागी थी जिसे NATO की एयर डिफेंस ने शॉट डाउन कर दिया। हालांकि ईरान ने इस बात से भी इनकार किया है कि उसने तुर्की में नाटो के बेस पर हमला करने की कोशिश की है।लेकिन तुर्की ने भी आधिकारिक रूप से ये कहा है कि हमला ईरान ने ही किया है। तुर्की के बाद ही ये कहा गया कि ईरान ने अजरबैजान पर भी हमला किया है।

ईरान नए दुश्मन क्यों बना रहा है ?

अमेरिका और इज़रायल के हमलों को वो रोक नहीं पा रहा है। भले ही वो जवाबी हमला कर रहा है लेकिन अमेरिका और इज़रायल उसके तमाम स्ट्रैटेजिक लोकेशन्स पर रोज़ बमबारी और मिसाइल अटैक कर रहे हैं। ईरान पहले से ही इस जंग में अकेला है। उसने मिडिल ईस्ट के देशों पर स्ट्राइक कर उन्हें दुश्मन बना लिया है, तो अब तुर्की और अजरबैजान से भी पंगा लेकर क्यों नये दुश्मन खड़े कर रहा है।तो इसका जवाब यही हो सकता है कि ईरान तुर्की में मौजूद NATO बेस पर स्ट्राइक कर अमेरिका को चोट पहुंचाना चाहता था वहीं दूसरी तरफ अज़रबैजान इज़रायल का स्ट्रैटेजिक पार्टनर है। इज़रायल अजरबैजान को हथियारों की सप्लाई करता है तो अजरबैजान इज़रायल का मेजर तेल सप्लायर है।इज़रायल के टोटल ऑयल इम्पोर्ट का 46.4 परसेंट तेल अजरबैजान से आता है और वो भी तुर्की के Ceyhan पोर्ट के रास्ते। तो अज़रबैजान पर ईरान के हमले की वजह यही लगती है लेकिन जैसा कि मैंने पहले भी बताया कि ईरान ने तुर्की के NATO बेस और अज़रबैजान पर हमले की बात से इनकार किया है। क्या ईरान सच बोल रहा है? असल में बात ये है कि मार्च की शुरुआत में साइप्रस के अकरोतिरी में मौजूद यूनाइटेड किंगडम के एयरबेस पर ड्रोन स्ट्राइक हुई थी। शुरुआत में यही कहा गया कि ये हमला ईरान ने किया है लेकिन UK की डिफेंस मिनिस्ट्री ने कहा है कि ये ड्रोन ईरान ने लॉन्च नहीं किये थे।साइप्रस के बाद ऐसी ही ड्रोन और मिसाइल स्ट्राइक तुर्की और अजरबैजान पर की गई है जिसमें ईरान ने अपनी भूमिका से इनकार किया है। ऐसे में सवाल ये उठेंगे ना कि जब ईरान ने साइप्रस, तुर्की और अजरबैजान को टारगेट नहीं किया तो फिर किसने किया?क्या इसके पीछे अमेरिका या इज़रायल का हाथ है जो इस कॉन्फ्लिक्ट को और बड़ा बनाने की कोशिश कर रहे हैं या फिर इसमें किसी थर्ड पार्टी का हाथ है?

ईरान करेगा पाकिस्तान पर हमला ?

अगर तुर्की और अज़रबैजान की बातों पर यकीन करें तो पाकिस्तान के दो जिगरी पर ईरान हमला कर चुका है, तो कहीं अगला हमला पाकिस्तान पर तो नहीं होने वाला है क्योंकि आरोप लग रहे हैं कि पाकिस्तान ने ईरान पर की जाने वाले एयरस्ट्राइक के लिए अमेरिका को अपना एयरस्पेस दिया है, हालांकि अब तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान ने भी इन आरोपों को खारिज किया है लेकिन अगर इन आरोपों में ज़रा भी दम है तो पाकिस्तान को ईरान का निशाना बनते देर नहीं लगेगी।

Leave a Comment