चीन जा रहे रूसी ऑयल टैंकर ने बीच रास्ते लिया यू-टर्न, पहुंचने वाला है भारत को पोर्ट पर

By Alok Ranjan

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  • साउथ चाइना सी में रूसी टैंकर ने अपना रास्ता बदल लिया
  • और भी कई रूसी टैंकर्स ने बीच रास्ते से यू-टर्न ले लिया है
  • खबरें आ रही हैं कि ये रूसी टैंकर्स भारत की तरफ आ रहे हैं
  • एक हफ्ते में भारत ने रिकॉर्ड रूसी तेल की खरीद की है

चीन जा रहे रूसी टैंकर ने लिया यू-टर्न

भारत और रूस की दोस्ती का एक और बहुत बड़ा सबूत देखने को मिला है। हम सबको पता है कि मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग की वजह से ऑयल और गैस सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। अब 90 से ज्यादा देशों ने जिसमें अमेरिका भी शामिल ही पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें बढ़ा चुके हैं। भारत ने अभी तक तेल की दरों में इज़ाफा नहीं किया है। इसी बीच खबर ये आ रही है कि कई रूसी ऑयल टैंकर्स जो चीन जा रहे थे, उन्होंने बीच समंदर में यू-टूर्न लिया है और अब उनका रूख भारत की तरफ हो गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक रूसी टैंकर Aqua Titan पहले चीन के बंदरगाह Rizhao की ओर जा रहा था, लेकिन South China Sea में अचानक यू-टर्न लेकर अब New Mangalore Port (भारत) की ओर बढ़ रहा है।

7 रूसी ऑयल टैंकर्स के यू-टर्न लेने की खबर

रूस से चीन जा रहे तेल टैंकरों का भारत की ओर अचानक रुख बदलना एशिया की ऊर्जा राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने एक ही सप्ताह में 30 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीदा है। वजह ये बतायी जा रही है कि भारत ने अमेरिकी अस्थायी छूट (US waiver) का फायदा उठाकर रूस से कच्चे तेल की खरीद दोगुनी कर दी है। सिर्फ रूसी टैंकर Aqua Titan ही नहीं बल्कि कम से कम सात टैंकरों ने चीन की बजाय भारत का रुख किया है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो रही है और वैश्विक तेल व्यापार का नक्शा बदल रहा है।

बाकी 6 टैंकर्स भारत में कहां-कहां पहुंचेंगे ?

अब तक केवल एक टैंकर Aqua Titan की पूरी डिटेल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। बाकी छह टैंकरों की पहचान और मार्ग की जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन पुष्टि हो चुकी है कि वे भी चीन से भारत की ओर मोड़े गए हैं। कंपनी Vortexa Ltd. के अनुसार, कम से कम 7 रूसी टैंकरों ने चीन से भारत की ओर यू-टर्न लिया है। भारत के मुंबई, जामनगर, पारादीप और विशाखापत्तनम जैसे बंदरगाहों पर इन टैंकरों के पहुंचने की संभावना है।

क्यों नहीं है बाकी टैंकरों की डिटेल?

कई बार कंपनियां व्यापारिक गोपनीयता की वजह से टैंकरों की जानकारी सार्वजनिक नहीं करतीं ताकि व्यापारिक रणनीति उजागर न हो। कुछ टैंकर AIS (Automatic Identification System) सिग्नल बंद कर देते हैं ताकि उनकी रियल टाइम लोकेशन ट्रैक न हो सके। इसके अलावा रूस-भारत-चीन के बीच तेल व्यापार में बदलाव को लेकर संवेदनशीलता के कारण डिटेल सीमित रखी जाती है।

भारत क्यों बढ़ा रहा है रूसी तेल आयात?

  • मध्य-पूर्व संकट: ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ में अस्थिरता के कारण भारत को वैकल्पिक स्रोत चाहिए।
  • सस्ती कीमतें: रूस अपने Urals crude को भारी छूट पर बेच रहा है।
  • अमेरिकी छूट: अमेरिका ने अस्थायी रूप से भारत को रूसी तेल आयात बढ़ाने की अनुमति दी है।
  • चीन की मांग में कमी: चीन की आर्थिक सुस्ती के कारण उसकी तेल खपत धीमी हो रही है।

भारत के लिए रणनीतिक फायदे

  • ऊर्जा सुरक्षा: भारत को स्थिर और सस्ता तेल मिल रहा है।
  • रिफाइनरी लाभ: IOC, BPCL, HPCL और Reliance जैसी कंपनियाँ रूसी तेल को प्रोसेस कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल-डीजल बेच सकती हैं।
  • वैश्विक स्थिति: भारत रूस का सबसे भरोसेमंद ग्राहक बन रहा है, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे।

भारत-रूस के नज़रिए से क्यों अहम है ?

चीन की मांग घटने पर भारत रूस के लिए सबसे बड़ा विकल्प बन गया है। इसके साथ साथ रूस राजनीतिक संदेश भी दे रहा है कि वो पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद एशिया में मजबूत ग्राहक ढूंढ सकता है। भारत का रूसी तेल पर दांव फिलहाल सफल दिख रहा है। सस्ती कीमतें, स्थिर आपूर्ति और अमेरिकी छूट ने भारत को एशिया का सबसे बड़ा रूसी तेल खरीदार बना दिया है। लेकिन यह रणनीति लंबे समय तक तभी टिकेगी जब भारत संतुलन बनाए रखे और पश्चिमी दबाव से निपटने की तैयारी करे।

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