भारत के मुसलमानों में ISI की घुसपैठ का सबूत
इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) के साथ मिलकर यूपी ATS और दिल्ली ATS ने एक ज्वाइंट ऑपरेशन में अज़ीम राणा और उसके भतीजे आज़ाद अली को गिरफ्तार किया है। अज़ीम की गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश के हापुड़ से की गयी है जबकि आज़ाद अली को मेरठ से पकड़ा गया है। इन दोनों की गिरफ्तारी से एक बार फिर ये बात पुख्ता हो गयी है कि देश के मुसलमानों के बीच पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की कितनी पहुंच हो गयी है। ज़ाहिर है मज़हब एक होने और पाकिस्तान के इस्लामिक देश होने की वजह से भारतीय मुसलमानों के एक वर्ग में इनके प्रति सॉफ्ट कॉर्नर है।
क्यों हुई गिरफ्तारी ?
अज़ीम राणा और उसका भतीजा आज़ाद अली दोनों दिल्ली और नोएडा के संवेदनशील जगहों की रेकी कर रहे थे। पुलिस ने जब इन पर सर्विलांस बिठाया तो पता चला कि दोनों दिल्ली मेट्रो स्टेशन और नोएडा के प्रमुख और बड़े मंदिरों की वीडियो बना रहे थे, उनकी फोटो भी ले रहे ते। इन वीडियो और तस्वीरों को टेलीग्राम ऐप के ज़रिए पाकिस्तान में मौजूद अपने हैंडलर को भेज रहे थे। जांच में सामने आया कि आरोपी पिछले छह महीनों से पाकिस्तान के शहज़ाद भट्टी नामक गैंगस्टर से संपर्क में थे, जिसके आईएसआई से गहरे रिश्ते बताए जाते हैं।
ISI का नेटवर्क भारत में कैसे काम कर रहा है ?
पाकिस्तान आईएसआई की साजिश लगातार सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर भारतीय मुस्लिम युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करना है। आईएसआई से जुड़े नेटवर्क भारतीय युवाओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भर्ती कर रहे हैं। उन्हें धार्मिक स्थलों और महत्वपूर्ण संस्थानों की रेकी (surveillance) करने का काम सौंपा जाता है। मंदिरों और मेट्रो जैसी जगहों की जानकारी जुटाना किसी बड़े आतंकी हमले की तैयारी का हिस्सा हो सकता है। यह घटना दर्शाती है कि आईएसआई भारत में धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर सांप्रदायिक तनाव और अस्थिरता फैलाना चाहता है।

आरोपियों के पास से क्या मिला ?
पुलिस ने आरोपियों से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इनसे कई संवेदनशील वीडियो और चैट्स मिली हैं, जो सीधे पाकिस्तान नेटवर्क से जुड़ाव दिखाती हैं। पाकिस्तान की आईएसआई लंबे समय से भारत में जासूसी और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देती रही है। धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा बल्कि सामाजिक सद्भाव के लिए भी खतरा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग कर और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर आतंकवादी नेटवर्क आसानी से जानकारी साझा कर रहे हैं। यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती है, क्योंकि ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी करना कठिन होता है।
खतरा लगातार बढ़ रहा है
यह घटना स्पष्ट करती है कि पाकिस्तान आईएसआई भारत में धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक परिवहन को निशाना बनाकर बड़े आतंकी हमले की योजना बना रहा है। यूपी एटीएस और आईबी की संयुक्त कार्रवाई ने समय रहते इस साजिश को नाकाम कर दिया। लेकिन यह भी सच है कि ऐसे नेटवर्क लगातार सक्रिय हैं और भारत को अपनी सुरक्षा व खुफिया तंत्र को और मजबूत करना होगा।







