यूपी में संभल की रहने वाली इरम निकली पाकिस्तानी जासूस, लाखों पाकिस्तानी महिलाएं भारत में मौजूद

By Alok Ranjan

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  • ISI की घुसपैठ ज्यादातर मुस्लिम परिवारों तक हुई
  • लाखों की संख्या में पाकिस्तानी भारत में मौजूद
  • पाकिस्तानी लड़की-लड़कों से शादी पर बैन जरूरी
  • देश की सुरक्षा पर बहुत बड़ा खतरा

भारतीय मुस्लिम परिवारों में ISI की घुसपैठ

यूपी के गाज़ियाबाद में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के जिस स्पाई नेटवर्क का पर्दाफाश किया गया है उसने बड़ी चिंता पैदा कर दी है। चिंता देश के मुस्लिम परिवारों में बढ़ती ISI के घुसपैठ की। उत्तर प्रदेश एटीएस ने संभल की रहने वाली इरम शाने मेहराज को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उस पर दिल्ली और अन्य संवेदनशील रक्षा स्थलों की तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तानी नंबरों पर भेजने का आरोप है। यह गिरफ्तारी भारत में सक्रिय पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क पर एक बड़ा खुलासा मानी जा रही है।

कैसे पकड़ी गई इरम ?

गाजियाबाद पुलिस और उत्तर प्रदेश एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इरम शाने मेहराज को संभल जिले के नखासा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों को पहले से इनपुट मिला था कि एक महिला विदेशी नंबरों पर संवेदनशील सूचनाएं साझा कर रही है। जब उसके मोबाइल और इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स की जांच की गई तो पता चला कि वह कई पाकिस्तानी और विदेशी नंबरों से जुड़ी हुई थी और लगातार रक्षा स्थलों की लोकेशन, फोटो और वीडियो भेज रही थी। एटीएस ने इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और स्थानीय स्तर पर पूछताछ के जरिए इरम की गतिविधियों पर नजर रखी। उसके मोबाइल से कई ऐसे वीडियो और फोटो मिले जो दिल्ली और अन्य संवेदनशील रक्षा इलाकों के थे। यही सबूत उसके खिलाफ सबसे मजबूत साबित हुए। इसके अलावा, वह एक इंटरनेट मीडिया ग्रुप में भी सक्रिय थी, जिसमें पाकिस्तानी हैंडलर जुड़े हुए थे।

इरम शाने मेहराज कौन है?

इरम मूल रूप से संभल जिले के दीपा सराय की रहने वाली है। शादी के बाद वह गाजियाबाद में रह रही थी। बताया जाता है कि शादी के कुछ साल बाद ही उसके पाकिस्तानी नंबरों से संपर्क शुरू हुए और धीरे-धीरे वह आईएसआई के लिए काम करने लगी। स्थानीय स्तर पर उसके मायके और ससुराल दोनों जगह इस गिरफ्तारी से सनसनी फैल गई है। इरम अपने पति फैजान के साथ गाजियाबाद में रहती है और दो दिन पहले संभल ससुराल आई थी।

आईएसआई का जासूसी नेटवर्क

भारत में आईएसआई लंबे समय से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से लोगों को हनीट्रैप कर जासूसी करवाने की कोशिश करता रहा है। हाल ही में कई नौसेना और सेना के जवान भी इसी तरह फंसकर पकड़े गए हैं। इरम का मामला इस नेटवर्क की गहराई को दिखाता है कि अब महिलाएं भी इसमें शामिल की जा रही हैं।

भारत-पाकिस्तान में शादी सबसे बड़ा खतरा

भारत-पाकिस्तान के बीच विवाह संबंधों का एक लंबा इतिहास है। कई पाकिस्तानी महिलाएं भारतीय पुरुषों से शादी करके भारत में रह रही हैं। वहीं, कुछ भारतीय लड़कियां पाकिस्तानी पुरुषों से शादी के बाद भारत में आकर बस गई हैं। इन रिश्तों से हजारों बच्चे पैदा हुए हैं जिनका एक पक्ष पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है—या तो मां की ओर से या पिता की ओर से। यह सामाजिक और सांस्कृतिक रिश्तों का जटिल पहलू है, जो दोनों देशों के बीच मानवीय संबंधों को दर्शाता है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां इस बात पर लगातार नजर रखती हैं कि कहीं ऐसे रिश्तों का इस्तेमाल जासूसी या खुफिया गतिविधियों के लिए न किया जाए।

कितने पाकिस्तानी मूल के लोग भारत में मौजूद ?

अनुमानित तौर पर भारत में लाखों पाकिस्तानी महिलाएं रह रही हैं, जिनमें से अधिकांश भारतीय पुरुषों से शादी करके आई हैं। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार यह संख्या पाँच लाख से भी अधिक हो सकती है, जबकि आधिकारिक आँकड़े इससे काफी कम बताते हैं।

  • 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल लगभग 9.18 लाख पाकिस्तानी मूल के लोग रह रहे थे। इसमें हिंदू और सिख शरणार्थी भी शामिल हैं, जो पाकिस्तान से स्थायी रूप से भारत में बस गए हैं।
  • 2025 में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने संसद में कहा कि भारत में 5 लाख से अधिक पाकिस्तानी महिलाएं रह रही हैं, जो भारतीय पुरुषों से शादी करके आई हैं लेकिन नागरिकता नहीं ली है।
  • वहीं, स्थानीय स्तर पर पुलिस की रिपोर्टें बताती हैं कि कई जिलों में दर्जनों पाकिस्तानी महिलाएं लंबे समय से रह रही हैं। उदाहरण के लिए, मुरादाबाद जिले में 22 पाकिस्तानी महिलाएं पाई गईं।

सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

बड़ी संख्या में पाकिस्तानी महिलाओं के भारत में रहने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क रहती हैं। कई बार ऐसे रिश्तों का इस्तेमाल जासूसी नेटवर्क के लिए किया गया है। इरम शाने मेहराज की गिरफ्तारी ने यह दिखाया कि कैसे व्यक्तिगत रिश्तों और सोशल मीडिया का इस्तेमाल आईएसआई जैसी एजेंसियां कर सकती हैं। इरम शाने मेहराज की गिरफ्तारी भारत में सक्रिय पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क की गंभीरता को उजागर करती है। यह मामला दिखाता है कि आईएसआई किस तरह से आम नागरिकों को अपने जाल में फंसाकर संवेदनशील सूचनाएं हासिल करने की कोशिश करता है। भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी सफलता है, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी है कि सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रिश्तों के जरिए जासूसी का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

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