मेड इन इंडिया शेषनाग स्ट्राइक ड्रोन
ये भारत का शेषनाग 150 स्ट्राइक ड्रोन है जिसे बेंगलुरु बेस्ड स्टार्ट अप न्यू स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी ने। ये ड्रोन भारत को एयर स्ट्राइक की एक जबरदस्त ताक़त देने वाला है। हमने रूस-यूक्रेन वॉर के बाद अब ईरान बनाम अमेरिका और इज़रायल की जंग में भी शाहेद ड्रोन की स्ट्राइक कैपेब्लिटी को देख लिया है। ईरान के इन ड्रोन्स ने पूरे मीडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी बेसेज़ को अच्छा-खासा नुकसान पहुंचाया है। एक तो अमेरिका के एयर डिफेंस सिस्टम्स शाहेद को पूरी तरह से इंटरसेप्ट नहीं कर पा रहे हैं और कर भी रहे हैं तो ये उनके लिए बहुत भारी पड़ रहा है। उसकी वजह ये है कि एक शाहेद की कीमत करीब-करीब 20 से 30 हज़ार डॉलर होती है जबकि एक इंटरसेप्टर मिसाइल की क़ीमत 3 मिलियन से 12 मिलियन डॉलर तक होती है। यानी ईरान के इन ड्रोन्स को मार गिराना भी अमेरिका और इज़रायल के साथ-साथ मिडिल ईस्ट के देशों को नुकसान पहुंचा रहा है।
इंडियन मिलिट्री के लिए बन रहे ड्रोन
न्यू स्पेस रिसर्च इस ड्रोन पर कई सालों से काम कर रहा है। करीब साल भर पहले उसने अपने इस ड्रोन की फ्लाइट टेस्टिंग भी की थी। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद इंडियन मिलिट्री की तरफ से कंपनी को अलग-अलग तरह के ड्रोन्स तैयार करने के निर्देश दिये गये थे। इनमें लॉन्ग रेंज और स्वार्म अटैक वाले ड्रोन्स भी शामिल थे। इसके बाद ही कंपनी ने स्ट्राइक ड्रोन्स पर तेज़ी से काम शुरू किया था और अब जबकि मिडिल ईस्ट में छिड़ी वार में ईरान के शाहेद ड्रोन की कामयाबी नज़र आ रही है तो शेषनाग 150 से भी उम्मीदें बंध गई हैं। अभी ये ड्रोन डेवलपमेंटल फेज़ में है।
शेषनाग ड्रोन की खूबियां
शेषनाग 150 की रेंज 1000 किलोमीटर है यानी ये अमृतसर या पठानकोट से उड़ कर पाकिस्तान में डीप स्ट्राइक कर सकता है। इसकी फ्लाइट एन्ड्यूरेंस 5 घंटे की और स्पीड करीब 200 किलोमीटर प्रति घंटे की है। इसमें 25 से 40 किलोग्राम तक का वारहेड लगाया जाता है जो रडार, कंट्रोल रूम, बख़्तरबंद गाड़ियां, कम्यूनिकेशन सेंटर्स को नुकसान पहुंचा सकता है। ये शाहेद की तरह सिंगल स्ट्राइक ड्रोन नहीं है बल्कि ये स्वार्म अटैक करने वाला ड्रोन है यानी एक साथ की शेषनाग 150 ड्रोन्स दुश्मन पर हमला करेंगे।

AI तकनीक से लैस है शेषनाग
इससे दुश्मन के रडार सिस्टम और एयर डिफेंस के लिए इन सभी को इंटरसेप्ट करना मुश्किल होगा और ये ड्रोन्स अपने टारगेट को हिट कर सकेंगे। AI नेटवर्किंग वाले ये स्वार्म ड्रोन दुश्मन पर को-ऑर्डिनेटेड अटैक के लिए तैयार किये गये हैं। इसमें AI Based Navigation, GPS Denied Environment में काम करने की क्षमता भी है। इसी वजह से शेषनाग 150 प्लेटफ़ॉर्म बहुत कम इंसानी दखल के अपने टारगेट को ऑटोनॉमस रूप से पहचान सकता है, उन्हें टैक कर सकता है और फिर उन पर अटैक कर सकता है।

ऑटोनोमस काम करता है शेषनाग ड्रोन
इस ड्रोन की एक जबरदस्त खासियत ये है कि ये डीसेंट्रलाइज्ड इंटेलिजेंस रेजिलिएंस की थ्योरी पर काम करता है। अगर ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन के साथ कम्युनिकेशन में रुकावट आती है, तो भी स्वार्म काम करना जारी रखता है। अगर स्वार्म के कुछ ड्रोन इंटरसेप्ट किये जाते हैं, तो बाकी की यूनिट अपने हमले को नये सिरे से तैयार करती है यानी ये मिशन के बीच में भी अपने अपनी ऑपरेशन में बदलाव कर उसे अंजाम तक पहुंचा सकती है। इसकी बनावट और इसका स्ट्राइक पैटर्न ईरान के शाहेद से बहुत कुछ मिलता जुलता है।
कंपनी को है शेषनाग से बहुत उम्मीदें
न्यू स्पेस के CEO समीर जोशी ने ट्वीट किया था-शाहेद/LUCAS क्लास LR-OWA इफ़ेक्टर्स से मिली सफलता ने दुनिया भर में इस वर्टिकल को बढ़ावा दिया है। NS_Future Ready का Sheshnag150 UAV भारत में ऐसा अकेला ऑपरेशनल सिस्टम है। आत्मनिर्भर भारत के तहत डेवलप किया गया, यह क्लास इंटेलिजेंट स्वॉर्मिंग इफ़ेक्ट्स का इस्तेमाल करता है। भारत में प्राइवेट प्लेयर्स इस तरह के अटैक ड्रोन बनाने की फील्ड में काफी अच्छा काम कर रहे हैं। शेषनाग 150 की ही तरह प्रोजेक्ट काल स्ट्राइक ड्रोन का डेवलपमेंट भी तेज़ी से हो रहा है। तो उम्मीद है कि आत्मनिर्भर भारत और स्टार्ट अप इंडिया के मंत्र के साथ बनाये जा रहे ये ड्रोन्स हमारी सेनाओं को नई ताक़त, नई क्षमता से लैस करेंगे।











