2020 में जिस इज़रायली ड्रोन के दम पर अज़रबैजान ने आर्मेनिया को लड़ाई में हराया था….क्या भारत ने उस ड्रोन की टेक्नोलॉजी आर्मेनिया को दे दी है?…क्या आर्मेनिया भी अब उसी तरह के ख़तरनाक ड्रोन से लैस हो गया है?…आप सोच रहे होंगे दोस्तों कि मैं ये क्या सवाल कर रहा हूं लेकिन ये सवाल मेरे नहीं हैं। ये तो अज़रबैजान के सवाल हैं।..दोस्तों, पाकिस्तान और तुर्की का यार अज़रबैजान भारत पर बौखलाया हुआ है…आर्मेनिया को भारत से आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम, एंटी ड्रोन टेक्नोलॉजी, होवित्ज़र गन्स समेत और कई हथियार दिये जाने से अज़रबैजान पहले से ही भारत से नाराज़ था, लेकिन इस बार वो कुछ ज़्यादा ही भड़का हुआ है- और केवल भारत पर ही नहीं बल्कि अपने डिफेंस पार्टनर इज़रायल से भी वो खासा नाराज़ है…सवाल उठता है कि अज़र भाईजान को आख़िर किस बात की नाराज़गी है….उसकी नाराज़गी की वजह मैं बताता हूं दोस्तों।
इस वीडियो को देखिये- ये तब का वीडियो है जब भारत के CDS जनरल अनिल चौहान फरवरी की शुरुआत में आर्मेनिया के दौरे पर थे….इस विजिट के दौरान आर्मेनिया के डिफेंस मिनिस्टर Suren Papikyan ने CDS जनरल चौहान को आर्मेनिया के उन हथियारों को भी दिखाया था जो अजरबैजान के साथ जंग में इस्तेमाल किये जा रहे हैं…इनमें से बहुत से वो हथियार थे जिन्हें भारत ने ही आर्मेनिया को एक्सपोर्ट किये हैं….अब जैसे 155 mm ATAGS, 155 mm Towed Howitzer Artillery System, भारत फोर्ज का 155mm Self Propelled Howitzer, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, एंटी ड्रोन सिस्टम्स।..इनके अलावा आर्मेनिया ने अपने कई ड्रोन्स भी CDS को दिखलाए थे। तो जब आर्मेनिया ने CDS को अपने ड्रोन्स दिखलाये उसी समय से अज़रबैजान के होश उड़ गये।वैसे तो आर्मेनिया के पास कई तरह के Strike Drones, Loitering munitions, Swarm Drones और Surveillance UAV’s हैं
लेकिन अज़रबैजान की नज़रें जिस ड्रोन पर टिक गई वो था Dragonfly DDS 3….इस ड्रोन पर नज़र पड़ते ही अज़रबैजान बौखला गया। असल में Dragonfly DDS 3 बिल्कुल इज़रायल की IAI के डेवपल किये हुए Harop ड्रोन की तरह नज़र आ रहा था …देखिये ये वो ड्रोन है जो आर्मेनिया ने शो केस किया था और ये IAI का बनाया हुआ Harop….अब बात ये है कि 2019-20 में इज़रायल ने अज़रबैजान को Harop ड्रोन सप्लाई किये थे। इज़रायल के इस ड्रोन ने काराबाख की लड़ाई का रुख पलट दिया था।आर्मेनिया को इन इज़रायली कामिकेज़ ड्रोन ने बहुत नुकसान पहुंचाया था और इन्हीं ड्रोन्स की वजह से 2020 में अज़रबैजान ने आर्मेनिया को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।उस समय इंडिया टुडे ने भी स्टोरी पब्लिश की थी कि अजरबैजान को आर्मेनिया पर मिली जीत से भारत को भी ड्रोन वारफेयर में सबक लेना चाहिए।लेकिन जबसे भारत ने आर्मेनिया को हथियार सप्लाई करने शुरू किये तब से आर्मेनिया ने भी अज़रबैजान को तगड़ा जवाब दिया है। भारत के तोप, एयर डिफेंस सिस्टम और रॉकेट सिस्टम अज़रबैजान को खासा नुकसान पहुंचा रहे हैं।

वहीं भारत से भेजे गये एंटी ड्रोन सिस्टम भी आर्मेनिया के लिए बहुत कारगर साबित हुए हैं। यहां तक तो अज़रबैजान बर्दाश्त कर रहा था लेकिन जब उसने आर्मेनिया का Dragonfly DDS 3 ड्रोन देखा तो वो बेकाबू हो गया। उसे लगा कि जिस इज़रायली ड्रोन की मदद से उसने जंग जीती थी, अब वो ड्रोन आर्मेनिया के पास भी पहुंच चुका है, वो भी भारत के रास्ते।असल में इज़रायल की एक न्यूज़ वेबसाइट ने भी कुछ ऐसी ही ख़बर पब्लिश की थी। उसने हेडलाइन बनाई- आर्मेनिया ने IAI के हारोप जैसा दिखने वाला सुसाइड ड्रोन पेश किया …ख़बर में ये बताया गया कि भारत ने 2020 से 2024 के बीच इज़रायल से 20.5 बिलियन डॉलर के डिफेंस इक्विपमेंट्स और हथियार खरीदे हैं।और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेक इन इंडिया पॉलिसी की वजह से विदेशी कंपनियों को अपनी प्रोडक्शन लाइनें और टेक्नोलॉजी भारत के साथ शेयर करनी पड़ती हैं और इस तरह भारत इम्पोर्टर से इंडिपेन्डेंट डिफेंस एक्सपोर्टर बन जाता है और ये इज़रायल के हितों को चुनौती देता है जैसा अभी आर्मेनिया में हो रहा है।असल में IAI भारत में अडाणी डिफेंस के साथ मिलकर Harop ड्रोन का प्रोडक्शन कर रहा है। इसलिए आरोप लग रहे हैं कि भारत ने आर्मेनिया को हारोप ड्रोन की टेक्नोलॉजी या फिर उससे मिलता जुलता ड्रोन दे दिया।अब तक इसका जवाब भारत की तरफ से तो नहीं आया है लेकिन आर्मेनिया के फॉरेन अफेयर्स और सिक्योरिटी से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट Hov Nazaretyan ने भारत के खिलाफ चलाए जा रहे इस प्रोपेगेंडा का अपने ट्वीट थ्रेड से जबरदस्त जवाब दिया है।उन्होंने अपने पहले ट्वीट में लिखा इज़राइली आउटलेट ग्लोब्स न्यूज़ का दावा है कि भारत ने शायद आर्मेनिया को लोइटरिंग म्यूनिशन टेक ट्रांसफर की है, जिससे हारोप जैसा सुसाइड ड्रोन (Davaro का Dragonfly DDS 3) बनाना मुमकिन हो सका, जिसे हाल ही में भारत के चीफ ऑफ स्टाफ को दिखाया गया था। इस बात से इनकार नहीं किया जा रहा है, लेकिन शक करने की वजहें हैं, एक थ्रेड:-Hov ने आर्मेनिया के Davaro Defense Systems के डायरेक्टर David Galoyan के उस ट्वीट को रिट्वीट किया जो उन्होंने 4 अप्रैल 2021 को किया था।
इस ट्वीट में David ने DEV-3 ड्रोन की तस्वीर लगाई थी…Hov ने अपने ट्वीट में लिखा आर्मेनिया की लीडिंग ड्रोन बनाने वाली कंपनी डावारो ने अप्रैल 2021 में ही Dev-3 को पेश किया, जो DDS-3 का शुरुआती नाम था। यह सितंबर 2022 में पिनाका ऑर्डर के साथ आर्मेनिया-भारत डिफेंस कोऑपरेशन के असल में शुरू होने से बहुत पहले की बात है।एक ट्वीट में उन्होंने 2020 में किये गये खुद के ट्वीट्स के अलावा कुछ और ट्वीट्स को रिट्वीट किया।Hov ने 21 जुलाई 2020 को किये गये अपने ट्वीट में बताया था कि आर्मेनिया की मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने लड़ाई के दौरान गिराये गये इज़रायली ड्रोन्स जैसे ऑर्बिटर 2, स्काई स्ट्राइकर और हारोप के मलबे को दिखाया था। उनमें से कुछ की तस्वीरें Hov ने खुद खींची थी।एक दूसरे ट्वीट में बताया गया था कि क्रैश किये गये इज़रायली ड्रोन्स को आर्मेनिया की ड्रोन कंपनी के पास भेज दिया गया है ताकि वो इन ड्रोन्स की टेक्नोलॉजी की जानकारी हासिल कर सके।तो Hov ने इन पुराने ट्वीट्स को रिट्वीट करते हुए यही लिखा कि जुलाई 2020 में अर्मेनियाई MoD ने गिराए गए और क्रैश हुए इज़राइली ड्रोन दिखाए थे। उस समय डावारो के डायरेक्टर ने कहा था कि इन्हें स्टडी के लिए अर्मेनियाई कंपनियों को ट्रांसफर कर दिया गया था।Hov के ये ट्वीट्स इस बात को साबित कर रहे हैं कि आर्मेनिया के पास इज़रायली ड्रोन्स की टेक्नोलॉजी भारत से उसके डिफेंस पैक्ट से पहले ही पहुंच चुकी थी। आर्मेनिया ने क्रैश किये हुए इज़रायली ड्रोन्स को एनालिसिस कर बहुत सारी जानकारियां हासिल कर ली थी।इतना ही नहीं, Hov ने Dragonfly DDS 3 को बनाने वाली कंपनी Davaro का एक वीडियो स्नैपशॉट भी शेयर किया है जिसमें कंपनी ने ये बताया है कि वो इस ड्रोन को 2019 से ही डेवलप कर रही थी।इससे साफ होता है कि आर्मेनिया का हारोप जैसा दिखने वाले Dragonfly DDS 3 ड्रोन की टेक्नोलॉजी, आर्मेनिया को भारत से नहीं मिली है। आर्मेनिया ने इसे खुद ही डेवलप किया है। भई आर्मेनिया ने हमारे CDS को जितने ड्रोन्स दिखलाए थे उनमें से बहुत से ड्रोन उनके अपने बनाये हुए थे। तो ऐसा थोड़े ही है कि आर्मेनिया हर चीज़, हर हथियार भारत से ही ख़रीद रहा है।लेकिन यहां गेम कुछ और खेलने की कोशिश की जा रही थी। गेम ये कि भारत पर इज़रायली ड्रोन्स की टेक्नोलॉजी आर्मेनिया को लीक करने के आरोप लगाये गये।
आर्मेनिया और अजरबैजान में कॉन्फ्लिक्ट है। इज़रायल अजरबैजान को हथियार सप्लाई करता है, हारोप ड्रोन भी दिये थे। वहीं भारत आर्मेनिया को डिफेंस एक्सपोर्ट कर रहा है। लेकिन इज़रायल और भारत भी डिफेंस पार्टनर हैं। इज़रायल ने भारत को ना केवल हारोप ड्रोन दिये हैं बल्कि वो भारत में भी उसका प्रोडक्शन कर रहा है। तो भारत पर इस ड्रोन की टेक्नोलॉजी लीक करने के आरोप लगाकर भारत और इज़रायल के बीच दरार डालने की कोशिश भी की जा रही है। लेकिन भारत और इज़रायल की इस दोस्ती के बीच प्रोपेगेंडा करने की कोशिश को झटका भी लग चुका है।इज़रायल ने ये साफ किया है कि आर्मेनिया के हारोप जैसा ड्रोन अनविल करने से ना तो इज़रायल-अजरबैजान के बीच कोई विवाद पैदा होगा और ना भारत-इज़रायल के बीच…यहां तक कि IAI ने भी ग्लोब्स न्यूज़ की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। तो भारत और इज़रायल के खिलाफ प्रोपेगेंडा करने वालों को भी जवाब मिल गया है और हारोप जैसे Dragonfly DDS 3 को देखकर अजरबैजान को मिर्ची भी लग गई है।










