- तीन दिनों की भारत यात्रा पर हैं ब्रिटिश एयरफोर्स चीफ
- भारत-ब्रिटेन के बीच रक्षा संबंधों को मज़बूत करने वाला दौरा
- IAF के फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स RAF के पायलटों को ट्रेनिंग देंगे
- वेस्ट एशिया संकट संकट पर भारतीय वायुसेना चीफ से चर्च
ब्रिटेन के एयर चीफ मार्शल सर हार्व स्माइथ भारत दौरे पर हैं। उनका मुख्य उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच के रक्षा सहयोग को और ज्यादा मज़बूत करना है और उभरते हुए सुरक्षा खतरों पर चर्चा करना है। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह से उन्होंने मुलाकात की। दोनों वायुसेना प्रमुखों ने वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और उसके वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव पर विचार-विमर्श किया। यह संकेत देता है कि भारत और ब्रिटेन केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर भी साझेदारी कर रहे हैं।
दोनों देशों के एयरफोर्स चीफ मध्य प्रदेश के ग्वालियर मौजूद एयर फोर्स स्टेशन में भी जाएंगे। जहां ब्रिटिश एयरफोर्स चीफ भारतीय वायुसेना के ऑपरेशनल प्रोसीजर्स को करीब से समझने की कोशिश करेंगे। IAF ग्वालियर एयर फोर्स स्टेशन पर ब्रिटिश एयर फोर्स चीफ को अपने ऑपरेशनल प्रोसीजर्स की जानकारी देगी साथ में ये भी बताएगी कि न्यू एज एरियल थ्रेट्स को काउंटर करने की उनकी रणनीति कैसे काम करती है। इससे पहले एयर चीफ मार्शल सर हार्व स्माइथ नई दिल्ली में मौजूद नेशनल वॉर मेमोरियल गए और वहां पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्हें यहां पर गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
भारतीय फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स द्वारा ट्रेनिंग पर बेहद उत्साहित
ब्रिटिश एयर फोर्स चीफ ने भारत दौरे के दौरान भारतीय वायुसेना (IAF) द्वारा रॉयल एयर फोर्स (RAF) के पायलटों को ट्रेनिंग देने की पहल को ऐतिहासिक बताया। ब्रिटेन के एयर चीफ मार्शल स्माइथ ने कहा कि भारतीय वायुसेना की ट्रेनिंग क्षमता विश्वस्तरीय है और RAF पायलटों को IAF से प्रशिक्षण दिलाना दोनों देशों के बीच विश्वास और साझेदारी का प्रतीक है। उन्होंने इसे “भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक रणनीतिक कदम” बताया।

भारत आना और अपने सम्मानित सहयोगी व मित्र, एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के साथ हमारी रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना मेरे लिए एक विशेषाधिकार है। इस सितंबर में भारतीय वायुसेना के क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स का RAF वैली में आगमन – जो पहले से RAF कॉलेज क्रैनवेल में योगदान दे रहे IAF इंस्ट्रक्टर से जुड़ेंगे – हमारे संबंधों की गहराई, साझा पेशेवराना दृष्टिकोण और आपसी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
-Air Chief Marshal Sir Harv Smyth, UK Royal Air Force
भारत देगा ब्रिटिश पायलटों को ट्रेनिंग
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार भारतीय प्रशिक्षक ब्रिटिश पायलटों को ट्रेन करेंगे। पहले भारतीय पायलट ब्रिटेन में ट्रेनिंग लेते थे, अब भूमिकाएं उलट गई हैं। यह कदम भारत-UK रक्षा सहयोग की गहराई और विश्वास को दर्शाता है। IAF द्वारा RAF पायलटों को ट्रेनिंग देने का निर्णय भारत-UK रक्षा सहयोग में एक मील का पत्थर है। यह न केवल दोनों देशों की वायुसेनाओं को मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में भी अहम योगदान देगा। वेस्ट एशिया संकट और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए यह साझेदारी आने वाले वर्षों में और भी गहरी हो सकती है।

ये एक्सचेंज, साथ ही ट्रेनिंग और ऑपरेशनल सहयोग का विस्तार, रॉयल एयर फोर्स और भारतीय वायुसेना के बीच स्थायी बंधन को प्रदर्शित करते हैं। हमारी साझा प्रतिबद्धता सुरक्षा, स्थिरता और तकनीकी उत्कृष्टता के प्रति है। मैं इस गति को आगे बढ़ाने और आने वाले वर्षों में हमारी वायुसेनाओं के बीच सहयोग को और गहरा करने की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।
-Air Chief Marshal Sir Harv Smyth, UK Royal Air Force
भारतीय वायुसेना (IAF) पहली बार ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स (RAF) के पायलटों को ट्रेनिंग देगी। यह ट्रेनिंग वेल्स स्थित RAF वैली बेस पर होगी, जहां IAF के तीन क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स तैनात किए जाएंगे। ट्रेनिंग का फोकस फास्ट-जेट पायलटिंग पर होगा, जिसमें हॉक और अन्य एडवांस्ड जेट ट्रेनर्स का इस्तेमाल किया जाएगा।
ट्रेनिंग का स्वरूप
- स्थान: RAF वैली, वेल्स (UK)
- प्रशिक्षक: भारतीय वायुसेना के तीन अनुभवी फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स
- फोकस: फास्ट-जेट पायलट ट्रेनिंग (Hawk T2 और अन्य एडवांस्ड जेट ट्रेनर्स)
- अंतरराष्ट्रीय मान्यता: ट्रेनिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलेगी।
- तकनीकी सहयोग: ब्रिटेन की एडवांस्ड एविएशन टेक्नोलॉजी से सीखने का अवसर।
क्यों अहम है यह कदम?
- प्रशिक्षण क्षमता का वैश्विक मान्यता
IAF की ट्रेनिंग प्रणाली को विश्व में उच्च स्तर का माना जाता है। RAF पायलटों को इससे न केवल तकनीकी दक्षता मिलेगी बल्कि विविध परिस्थितियों में उड़ान भरने का अनुभव भी मिलेगा। - हिंद-प्रशांत में शक्ति संतुलन
भारत और ब्रिटेन दोनों ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता को लेकर चिंतित हैं। यह सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा। - रक्षा उद्योग और तकनीकी सहयोग
इस पहल से रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ेगा। भारत के “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम और ब्रिटेन की रक्षा तकनीक के बीच तालमेल से नए अवसर पैदा होंगे। - राजनीतिक संदेश
यह कदम स्पष्ट करता है कि भारत और ब्रिटेन अपने संबंधों को केवल व्यापार तक सीमित नहीं रख रहे, बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
भारत-UK रक्षा संबंधों की मजबूती
यह खबर भारत के लिए गर्व का विषय है क्योंकि इससे उसकी वायुसेना की क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है और ब्रिटेन जैसे पुराने सहयोगी के साथ संबंधों में नई ऊर्जा आई है। हाल के वर्षों में दोनों वायुसेनाओं ने कई संयुक्त अभ्यास किए हैं। RAF पायलटों को IAF की ट्रेनिंग से लाभ मिलेगा, वहीं भारतीय पायलटों को ब्रिटेन की तकनीकी विशेषज्ञता का अनुभव होगा। यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा।
UK के चीफ ऑफ एयर स्टाफ की भारत यात्रा ने UK-India रक्षा संबंधों के महत्व को और स्पष्ट कर दिया है। RAF वैली और RAF कॉलेज क्रैनवेल में भारतीय वायुसेना (IAF) के प्रशिक्षकों को शामिल करना, साथ ही अन्य सेवाओं के प्रशिक्षकों के साथ मिलकर काम करना, और लगातार जटिल होते जा रहे एयर एक्सरसाइज तथा मल्टी-डोमेन सहयोग, सभी क्षेत्रों में रक्षा संबंधों को ठोस और वास्तविक रूप से मजबूत करने का प्रतीक है। 2026 में भारत आने वाले ब्रिटेन के चौथे और सबसे वरिष्ठ फ्लैग-रैंक अधिकारी के रूप में यह दौरा साफ तौर पर यह संकेत देता है कि दोनों देश एक मजबूत रक्षा साझेदारी विकसित करने को रणनीतिक महत्व देते हैं
-Commodore Chris Saunders, Defence Adviser, British High Commission
IAF द्वारा RAF पायलटों को ट्रेनिंग देना भारत-UK रक्षा संबंधों में ऐतिहासिक मोड़ है। यह कदम दिखाता है कि भारत-UK संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता दी जा रही है। यह न केवल RAF की ट्रेनिंग क्षमता को मजबूत करेगा बल्कि IAF की वैश्विक प्रतिष्ठा को भी बढ़ाएगा। वेल्स में होने वाली यह ट्रेनिंग दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में यह सहयोग हिंद-प्रशांत और वेस्ट एशिया की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाएगा।








