घातक UCAV के लिए आयी अच्छी खबर
बहुत जल्द हमारा अपना बनाया हुआ, पूरी तरह से देश में बना हुआ UCAV यानी Unmanned Combat Aerial Vehicle घातक एयरफोर्स में शामिल होने वाला है। मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस की डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने हाल ही में 60 घातक UCAV की खरीद को मंजूरी दे दी है, हालांकि अभी इस पर CCS यानी कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी की सहमति आनी बाकी है। CCS से अप्रूवल मिलने के बाद ही घातक के लिए फाइनल फिनांशियल और डेवलपमेंटल फंड सेंक्शन हो पाएंगे। उम्मीद है कि ये हो भी जाएगा। लेकिन MoD के क्लियरेंस के बाद घातक के हमारी सेना में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है। इसे बहुत बड़ी अचीवमेंट के तौर पर देखा जा रहा है और उसकी एक नहीं कई वजहें हैं ।
घातक क्यों है बेहद घातक ?
घातक को DRDO की एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट स्टैबलिशमेंट यानी ADE ने बनाया है। ADE ने अनमैन्ड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट का प्रोजेक्ट 2009 में शुरू किया था और आज ये इस स्टेज पर पहुंच चुका है। इस UCAV के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में ADE के प्राइवेट पार्टनर लार्सन एंड ट्रूबो का भी योगदान है। इस UCAV की कुछ स्पेसिफिकेशन्स आपको बताता हूं।
- Stealth Unmanned Combat Aerial Vehicle
- Maximum Take Off Weight: 13 Ton
- Top Speed: 0.9 Mach
- Payload: 1.5-2 Ton
- Primary Missions: Suppression or Destruction of Enemy Air Defences
- Operational Range: 1000 KM
घातक का Maximum Take Off Weight 13 Ton है। इसकी Top Speed 0.9 Mach के आसपास की है यानी ये एक High-Subsonic Speed वाला ड्रोन है। ये 1.5 से 2 Ton का पेलोड कैरी कर सकता है और खास बात ये है कि ये Internal Payload है यानी ये UCAV के Fuselage के अंदर ही होगा, बाहर नहीं। इस UCAV को खास तौर पर SEAD यानी Suppression or Destruction of Enemy Air Defences मिशन के लिए तैयार किया गया है। इसकी रेंज 1000 किलोमीटर की है ।
- Low Observable Geometry
- Internal Weapon Bay
- AI-Driven Software
- Autonomous Mission System
- Distributed Aperture System
AI से लैस है घातक
ये एक स्टील्थ UCAV है। इसका एयरफ्रेम Low Observable Geometry वाला है यानी इसका एयरफ्रेम रडार सिग्नल को सोर्स के बजाय दूसरी तरफ डायवर्ट कर देता है । Internal Weapon Bay इसकी Stealth Power को और बढ़ा देता है। घातक में AI-Driven Software का इस्तेमाल किया गया है। ये Autonomous Mission System घातक को बिना बहुत ज़्यादा ह्यूमन इंटरफेयरेंस के मिशन को अंजाम देने की क्षमता देता है। इसमें साइलेंट सेंसर का भी इस्तेमाल किया गया है। Distributed Aperture System इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसरों के एक नेटवर्क का इस्तेमाल कर वार जोन का 360 डिग्री का व्यू मुहैया कराता है । घातक को स्टील्थ बनाने में इसके एयरफ्रेम में इस्तेमाल किये गये कार्बन कंपोजिट का सबसे बड़ा रोल है। घातक का एयरफ्रेम करीब-करीब 90% कार्बन कंपोजिट से बना है और इसी वजह से ये रडार सिग्नल्स को डायवर्ट कर देता है या फिर उसे अबजॉर्व कर लेता है ।
कावेरी इंजन की ताकत से घातक भरेगा उड़ान
भले ही हमारा कावेरी इंजन फाइटर जेट्स के लिए तैयार नहीं हो पाया है लेकिन इस UCAV में कावेरी टर्बोफैन का एक नॉन-आफ्टरबर्निंग वेरिएंट है। ये एक ड्राई कावेरी इंजन है जो 52kN का Thrust पैदा करता है और यही वजह है कि ये ड्रोन 1000 किलोमीटर की रेंज और 0.9 Mach की स्पीड हासिल कर पाता है। अब इसमें जिन हथियारों को लगाये जाने की बात की जा रही है उसके बारे में भी जान लीजिए। तो अभी तक की रिपोर्ट्स के मुताबिक इस ड्रोन को केवल इनबिल्ट वारहेड से लैस नहीं किया जाएगा बल्कि इसमें मिसाइलें और गाइडेड बम भी होंगे। कहा जा रहा है कि ADE इसे Astra Mk2 Air to Air Missile से लैस करने पर काम कर रहा है। अगर इस तरह की मिसाइल घातक के आर्मामेंट में शामिल हो जाती है तो इसकी मारक क्षमता एकदम से बढ़ जाएगी क्योंकि Astra Mk3 की रेंज 350 किलोमीटर की और स्पीड 4.5 Mach है
दुश्मनों के लिए कितना बड़ा खतरा ?
ये दुश्मन के फाइटर जेट, AWACS और एयर रिफ्यूलर जैसे कीमती असेट्स के लिए भी ख़तरा बन सकता है। तभी ये ऐसी रिपोर्ट्स आती हैं कि पाकिस्तान से लेकर चीन तक की नज़र घातक के डेवलपमेंट से जुड़ी हर ख़बर पर रहती है। फिलहाल डिफेंस मिनिस्ट्री ने इसके 3 प्रोटोटाइप बनाने की मंजूरी दी है और अगर इसे CCS की अप्रूवल मिल जाती है तो इस साल के अंत तक ये हमारी एयरफोर्स की शान बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा।







