- इस्लामाबाद, कराची, लाहौर में हिंसक विरोध प्रदर्शन
- पुलिस फायरिंग में 20 से ज्यादा लोगों की मौत
- कराची में अमेरिकी काउंसुलेट पर हमला
हमला ईरान पर लेकिन आग पाकिस्तान में लगी
अमेरिका और इज़रायल की मिसाइलें ईरान में बरस रही हैं लेकिन आग पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में लगी है| मिसाइलें इज़रायल के हायफा, जेरुसलेम, बेत सेमेश में तबाही मचा रही हैं लेकिन कोहराम पाकिस्तान के कराची में मचा हुआ है| सउदी अरब की रास तनुरा रिफायनरी में धमाके के बाद आग लगी हुई है लेकिन बवाल लाहौर में हो रहा है| कुवैत, बहरीन, UAE में अंगारे बरस रहे हैं लेकिन हाहाकार, गिलगित, क्वेटा, पेशावर में मचा हुआ है| अमेरिका और इज़रायल ने मिल कर पूरा मिडिल ईस्ट सुलगा दिया है। ईरान पर हमले की आग साउदी अरब, यूएई, बहरीन, क़तर, लेबनान, इराक समेत और भी कई देशों तक फैल चुकी है लेकिन गजब की बात देखिये कि इस जंग को लेकर पाकिस्तान के अंदर ही एक जंग शुरू हो गई है और इस जंग में अब तक 20 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं…..ये जंग है पाकिस्तान की सरकार और पाकिस्तान की पब्लिक के बीच। ईरान के सुप्रीम लीडर और शिया समुदाय के सबसे बड़े नेता अयातोल्ला अली खामनेई के मिसाइल स्ट्राइक में मारे जाने की ख़बर ने पाकिस्तान में हंगामा खड़ा कर दिया। शहर-शहर लोग खामनेई की हत्या के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। कराची में लोगों की भीड़ अमेरिकी काउंसुलेट के बाहर जमा हो गई। पथराव करने लगी। तोड़फोड़ करने लगी….भीड़ ने काउंसुलेट के बाहरी हिस्से में जमकर तबाही मचाई।

अमेरिकी काउंसुलेट पर हमले में क्या हुआ ?
लाठी-डंडों से लैस पाकिस्तानी भीड़ ने US काउंसुलेट की खिड़की और दरवाज़ों पर लगे शीशे तोड़ने की ख़ूब कोशिश की लेकिन ये शीशे टूटे नहीं….इसके बाद लोगों ने टायर और दूसरे सामान लगाकर वहां आग लगा दी….प्रदर्शनकारियों ने यूएस काउंसुलेट के अंदर ईरान का झंडा लहरा दिया….जब भीड़ का हमला और तेज़ हो गया तो काउंसुलेट के अंदर मौजूद अमेरिकी फोर्सेज़ ने फायरिंग शुरू कर दी….अमेरिकी सिक्योरिटी फोर्स की फायरिंग से डर कर भीड़ काउंसुलेट एरिया से बाहर भाग गई….लेकिन बाहर उनका बवाल, उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहा। अब ये समझिये कि पाकिस्तान में अमेरिका के खिलाफ इतना बड़ा प्रोटेस्ट हो जाए और पाकिस्तानी गर्वमेंट उसे बर्दाश्त कर ले। ये भला कैसे हो सकता था। तो कराची पुलिस ने यूएस काउंसुलेट पर हमला करने वाली भीड़ पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दी।ये कोई हवाई फायरिंग नहीं थी। ये फायरिंग इसलिए नहीं थी कि भीड़ वहां से भाग जाए, ये डायरेक्ट फायरिंग थी। सीधे लोगों को निशाना बनाते हुए गोलियां चलाई जा रही थीं…कराची पुलिस प्रदर्शनकारियों को घसीट रही थी। उन्हें घेर-घेर कर मार रही थी, क्यों- क्योंकि वो अमेरिका और इज़रायल के हमलों का विरोध कर रहे थे….पाकिस्तानी गर्वमेंट के मुताबिक इस फायरिंग में केवल 10 लोगों की जान गई है…लेकिन हकीकत इससे और भी भयानक है। सोशल मीडिया पर कराची सिविल हॉस्पिटल में भर्ती किये गये लोगों की एक लिस्ट सर्कुलेट की जा रही है। इस लिस्ट में 30 लोगों के नाम हैं जिनमें से 6 तो अस्पताल लाने से पहले ही मर चुके थे। घायलों में से अब तक कितनों की जान जा चुकी है उसका कोई डेटा अब तक नहीं बताया गया है|

पाकिस्तान के दूसरे शहरों में भी हिंसा
आग तो इस्लामाबाद में भी लगी। लोगों की भीड़ ने रेड जोन पर धावा बोल दिया। जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की….भीड़ को शांत कराने के लिए फेडरल इंटीरियर मिनिस्टर मोहसिन नकवी बात करने के लिए आए लेकिन भीड़ ने उन्हें घेर लिया। लोग उन्हें गालियां दे रहे थे। शाहबाज़ शरीफ और मुनीर को कोस रहे थे। कोई नकवी की बात सुनने के लिए तैयार नहीं था। किसी तरह वो अपना पजामा बचाकर वहां से भाग पाये।इसी तरह लाहौर, गिलगित, क्वेटा और पेशावर जैसे शहरों में भी जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किये गये हैं। और हर जगह पाकिस्तानी सरकार ने इस विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए पूरा ज़ोर लगा दिया।अब कहा जा रहा है कि हमला ईरान पर किया गया। ईरान ने जवाब में इज़रायल समेत मिडिल ईस्ट के कई देशों को लपेट लिया लेकिन पाकिस्तान में अमेरिका का विरोध करने का क्या मतलब है?असल में इस विरोध प्रदर्शन की वजह भले ही ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामनेई की हत्या है लेकिन इसकी जड़ें पाकिस्तान के अमेरिका और इज़रायल के साथ बने नेक्सस तक जा रही हैं। पाकिस्तान के लोग इस बात को अच्छी तरह से समझ रहे हैं कि पाकिस्तान भी अरब देशों की तरह अमेरिका और इज़रायल का पालतू बन चुका है।
प्रदर्शन करने वाले पाकिस्तानियों की डिमांड क्या है ?
पाकिस्तानी जानते हैं कि पाकिस्तान अमेरिका का छोड़िये, इज़रायल तक का पिट्ठू बन चुका है।लाहौर में भी प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने ना केवल अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ नारेबाज़ी की बल्कि अपनी शाहबाज़ सरकार को भी ख़ूब खरी-खोटी सुनाई है…पाकिस्तान के लोगों को अहसास हो चुका है कि ईरान पर किये गये अमेरिका और इज़रायल के हमले को लेकर पर्दे के पीछे से पाकिस्तान की भी सहमति थी और तभी इस्लामाबाद में हुए प्रोटेस्ट की अगुवाई कर रहे सीनेटर मुश्ताक अहमद खान ने पाकिस्तान की शाहबाज़ गर्वमेंट को ललकारा है। कहा है कि पाकिस्तान बोर्ड ऑफ पीस से बाहर आए….तो पाकिस्तानियों को पीस ऑफ बोर्ड की मेंबरशिप तो नागवार गुजर ही रही है, साथ-साथ वो पाकिस्तान से अमेरिकी डिप्लोमैट्स को भी बाहर करने की मांग कर रहे हैं और कराची, लाहौर, इस्लामाबाद समेत पूरे पाकिस्तान में खामनेई की मौत के बाद ये जो बवाल हुआ है ना, उसकी असल वजह भी यही है। पाकिस्तान का अमेरिका और इज़रायल का गुलाम बन जाना….यानी पीस बोर्ड को लेकर इज़रायल से यारी गांठने की आसिम मुनीर और शाहबाज़ शरीफ की बैक डोर से की जा रही कोशिशों के बाद अब ईरान पर हमला और खामनेई की हत्या ने पाकिस्तान को पूरी तरह से नंगा कर दिया है। अमेरिका और इज़रायल के मार्केट में सेल की तख़्ती लटकाए पाकिस्तान की पब्लिक को अब समझ में नहीं आ रहा है कि उनका स्टैंड क्या है? अब तो पाकिस्तान फिलीस्तीन और गजा के मुद्दों को भी पीछे छोड़ चुका है। अब तो पाकिस्तान इस्लामिक वर्ल्ड की बात को भी दरकिनार कर चुका है। अब इकलौता मुस्लिम न्यूक्लियर पावर पाकिस्तान इज़रायल का पालतू बन चुका है, और यही वजह है कि पाकिस्तानी बौखलाए हुए हैं। अगर ईरान में इसी तरह से अमेरिका और इज़रायल की तबाही जारी रही तो यकीन मानिये पाकिस्तान में इससे भी भयंकर आग लगने वाली है।











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