पाकिस्तान के बाद अब ईरान में भी फेल हुआ मेड इन चाइना एयर डिफेंस सिस्टम

By Alok Ranjan

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Chinese HQ-9B Air Defence System

ईरान में भयानक तबाही

कहते हैं ना कि चीनी माल पर भरोसा करना यानी अपने नुकसान को बुलावा देना।ईरान आज मिलिट्री इक्विपमेंट्स के मामले में चीन पर भरोसा करके पछता रहा है…चीन का एयर डिफेंस सिस्टम एक बार फिर फिसड्डी साबित हुआ है…28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर हमले की शुरुआत की थी और पहले ही दिन राजधानी तेहरान को टारगेट किया गया था…इन्हीं हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामनेई समेत कई आर्मी जनरल्स और लीडर्स मारे गये थे…लेकिन ईरान में तैनात एयर डिफेंस सिस्टम ना तो इन हमलों को रोक पाया, ना ही अमेरिकी और इज़रायली जेट्स और मिसाइल्स को काउंटर कर पाया…अमेरिकी मिसाइलें, गाइडेड बॉम्स और अटैक ड्रोन्स ईरान के एयरबेसेज़ को तबाह कर रहे हैं, ड्रोन फेसेलिटीज़ को टारगेट कर रहे हैं…गल्फ ऑफ ओमान में ईरान के 11-11 वारशिप को अमेरिका ने स्ट्राइक कर डुबो दिया…ईरान के न्यूक्लियर साइट्स, बैलेस्टिक मिसाइल्स स्टोरेज समेत तमाम क्रिटिकल पॉइन्ट्स पर ये हमले हो रहे हैं लेकिन ईरान इन्हें रोक नहीं पा रहा है।अमेरिका और इज़रायल के जेट्स बेखौफ हो कर ईरान पर बम बरसा रहे हैं, ऐसा लग रहा है कि उन्हें किसी एयर डिफेंस का डर नहीं है….अब तक एक भी अमेरिकी या इज़रायली जेट को ईरान की एयर डिफेंस शॉट डाउन नहीं कर पाई है….जो अमेरिकी F-15 गिरे भी हैं वो कुवैत में तैनात अमेरिकी सिस्टम की ही गलती से गिरे हैं….ऐसे में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम पर सवाल तो उठेंगे ना….लोग पूछेंगे ना कि भई, ईरान ने कौन सा एयर डिफेंस सेटअप लगाया हुआ है कि उससे ड्रोन तक नहीं मारा जा रहा I

मेड इन चाइना HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम में क्या है ?

ईरान के पास चाइना मेड एयर डिफेंस सिस्टम है। नाम है HQ-9B। अब आप कहेंगे कि ये नाम तो सुना-सुना लगता है। बिल्कुल सही लग रहा है आपको। ये नाम आपको ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सुनाई दिया होगा। उसके बारे में भी बताउंगा लेकिन पहले ईरान की बात करते हैं।तो ईरान ने पिछले साल चीन से इस एयर डिफेंस सिस्टम को ख़रीदा था।चीन का दावा है कि इस एयर डिफेंस की ऑपरेशनल रेंज 120 से 300 किलोमीटर की दूरी तक की है।

ये सिस्टम Fire-Control Radar से जुड़ा होता है। Semi-Active-Radar-Homing Guidance और 4+ Mach की स्पीड वाली इसकी मिसाइलें फाइटर जेट्स और बैलेस्टिक मिसाइल्स को काउंटर कर सकती हैं।चीन ने यही ख़ूबियां बता-बता कर अपने इस एयर डिफेंस सिस्टम को पाकिस्तान, अजरबैजान, तुर्कमेनिस्तान, उजबेकिस्तान और इजिप्ट के बाद ईरान को भी बेच डाला था।जब ये सिस्टम पिछले साल ईरान पहुंचने शुरू हुए थे तब भी ख़ूब ढोल बजाया गया था। कहा गया था कि अपने एयर डिफेंस को ताक़तवर बनाने के लिए ये ईरान का जबरदस्त क़दम है…लेकिन इस कॉन्फ्लिक्ट में आपको कहीं भी इस एयर डिफेंस सिस्टम के कारगर साबित होने की बात ना दिखाई देगी- ना सुनाई।

ईरान के पास कौन-कौन से एयर डिफेंस सिस्टम हैं ?

ये ईरान के पास सोवियत एरा का S-200 एयर डिफेंस सिस्टम भी है…इसके अलावा ईरान ने अपने भी कई एयर डिफेंस सिस्टम डेवलप किये हैं जिनमें सय्याद, तलाश और खोरदाद जैसे एयर टू सरफेस मिसाइल सिस्टम हैं।रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान ने 2007 में रूस से S-300 एयर डिफेंस ख़रीदने की डील की थी लेकिन 2010 में इंटरनेशनल सैंक्शन्स की वजह से रूस इससे पीछे हट गया था और तभी ईरान को चीन से एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने की डील करनी पड़ गई थी। हालांकि 2016 में रूस ने भी ईरान को S-300 की डिलिवरी कर दी थी…फरवरी में आई रिपोर्ट में ये भी बताया गया था कि ईरान ने S-300 की तैनाती भी कर दी है…लेकिन ईरान का सबसे ज़्यादा भरोसा चीन से लिये गये HQ-9 सिस्टम पर था, जो किसी काम का साबित नहीं हुआ।

पाकिस्तान-वेनेजुएला में भी नाकाम हुए थे चीनी एयर डिफेंस

केवल एक साल के दौरान ये तीसरी बार है जब चाइनीज़ डिफेंस प्रोडक्ट्स की नाकामी की कहानी दुनिया में गूंज रही है…पहले पिछले साल पाकिस्तान में चाइनीज़ एयर डिफेंस की पोल खुली थी…भारत ने पाकिस्तान के 11-11 एयरबेसेज़ पर स्ट्राइक की थी….इसमें रावलपिंडी का नूर खान भी शामिल था…इतना ही नहीं, भारत की मिसाइलों ने किराना हिल्स में पाकिस्तान की न्यूक्लियर फेसेलिटी को भी हिट किया था…इससे पहले इंडियन एयरफोर्स के गाइडेड बॉम्स ने बहावलपुर समेत पाकिस्तान के कई आतंकी ठिकानों को तबाह किया था…लेकिन पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम भारत के इन हमलों को रोक नहीं पाया था…और रोकना तो छोड़िये, भारत ने लाहौर में तैनात इस चाइनीज़ एयर डिफेंस सिस्टम को ही तबाह कर डाला था….पाकिस्तान के बाद इस साल जनवरी में अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया था। तब भी चाइनीज रडार और दूसरे इंटेलिजेंस और सर्विलांस सिस्टम्स नाकाम साबित हुए थे।वेनेजुएला ने चीन से थ्री डायमेंशनल JYL-1 Radar और JY 27 Wide Mat Radar खरीदा था।चीन ने दावा किया था कि उसका JY 27 अमेरिका के F-22 स्टील्थ जेट को भी ट्रैक कर सकता था…लेकिन क्या हुआ। जब अमेरिका ने हमला किया तो वेनेजुएला को इसकी भनक भी नहीं लगी। उस समय भी चीन के एयर डिफेंस और सर्विलांस सिस्टम सवालों के घेरे में आए थे।..और अब एक बार फिर ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमले ने भी ये साफ कर दिया है कि चाइनीज़ एयर डिफेंस भरोसे के लायक नहीं है। ऐसे में चीन के हथियारों और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे देशों के लिए ये किसी ख़तरे की घंटी से कम नहीं है।

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