- फिलीपींस के बाद ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा देश
- चीन से बढ़ते खतरे के मद्देनज़र सौदा बेहद अहम
- चीन को ब्रह्मोस के नए सौदे से चिढ़ मचनी तय
- भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट को बहुत बड़ा बूस्ट
इंडोनेशिया–भारत ब्रह्मोस डील
इंडोनेशिया ने भारत के साथ ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज़ मिसाइल खरीदने का समझौता किया है, जिससे वह फिलीपींस के बाद दूसरा विदेशी ग्राहक बन गया है। पिछले लंबे वक्त से ये खबरें आ रही थीं कि इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल को खरीदने में अपनी दिलचस्पी दिखा रहा है, पर अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पा रही थी। पर अब ये ऑफिशियल हो गया है कि इंडोनेशिया भारत के साथ ब्रह्ममोस सुपरसॉनिक क्रूज़ मिसाइल की खरीदने वाली डील में शामिल हो गया है। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उसने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली खरीदने का समझौता किया है। यह डील 200–350 मिलियन डॉलर के बीच आंकी जा रही है और इसका उद्देश्य इंडोनेशिया की मैरिटाइम डिफेंस कैपेबिलिटी को मजबूत करना है। इंडोनेशिया की डिफेंस मिनिस्ट्री के प्रवक्ता रिको रिकॉर्डो सीरैत ने रॉयटर्स को बताया है कि –

इंडोनेशिया ने भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली खरीदने का समझौता किया है। यह समझौता सैन्य हार्डवेयर और रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण का हिस्सा है, विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र मेंI
– Rico Ricardo Sirait, Spokesperson, Indonesian Defence Ministry
ऑपरेशन सिंदूर के बाद आयी तेजी
साल 2025 के मई महीने में भारत ने आतंकिवादियों के खिलाफ पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया था जो करीब चार दिनों तक चली थी। आतंकवादियों के खिलाफ इस कार्रवाई के जवाब में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के ठिकानों पर मिसाइलें, रॉकेट्स, ड्रोन्स मारे थे, जिन्हें हमारे इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम ने विफल बना दिया था। इसके बाद भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई दूसरे कई हथियारों के साथ ब्रह्मोस मिसाइल का भी इस्तेमाल किया था। ये पहली बार था जब भारत की अपनी मिसाइल ब्रह्मोस युद्ध में इस्तेमाल की गयी थी। पाकिस्तान के कई एयरबेसेज़ को ब्रह्मोस मिसाइल ने पिन प्वाइंट एक्यूरेसी के साथ हिट किया था। फिलीपींस इस मिसाइल प्रणाली का पहला विदेशी ग्राहक बना था।
फिलीपींस–भारत ब्रह्मोस डील
- 2022 में 375 मिलियन डॉलर का समझौता हुआ।
- भारत ने 2024 और 2025 में मिसाइलों की खेपें भेजीं।
- 2025 में तीसरी और अंतिम खेप की डिलीवरी के साथ यह डील पूरी हुई।
- फिलीपींस ने इन्हें अपनी कोस्टल डिफेंस कैपेबिलिटी को मजबूत करने के लिए शामिल किया।
इंडोनेशिया से ब्रह्मोस मिसाइल डील का रणनीतिक महत्व
भारत के लिए यह सौदा रक्षा निर्यात को बढ़ावा देगा और भारत को वैश्विक हथियार बाज़ार में एक मजबूत खिलाड़ी बनाएगा। वहीं इंडोनेशिया के लिए ये सौदा दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यह मिसाइल उसकी समुद्री सुरक्षा को ना सिर्फ मजबूत करेगी बल्कि इसे आधुनिका बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। फिलीपींस के साथ ब्रह्मोस की जो डील हुई थी उसकी मुख्य वजह भी चीन ही था क्योंकि चीन के साथ विवादित समुद्री क्षेत्रों में यह मिसाइल उसकी डिफेंस पोज़िशन को मज़बूत करती है।
ब्रह्मोस मिसाइल की खूबियां और तकनीकी डिटेल
- भारत-रूस द्वारा ज्वाइंट डेवलप मिसाइल
- स्पीड: Mach 2.8 (लगभग 3,400 km/h)
- रेंज: 290–300 किलोमीटर (नए वर्ज़न में और अधिक)
- लॉन्च प्लेटफॉर्म: जहाज़, पनडुब्बी, विमान और ज़मीनी मोबाइल लॉन्चर
- प्रिसीजन: हाई-एक्युरेसी स्ट्राइक, कम रिएक्शन टाइम
- पेलोड क्षमता: लगभग 200–300 किलोग्राम
- गाइडेंस सिस्टम: एडवांस्ड इनर्शियल नेविगेशन और GPS/GLONASS सपोर्ट
- स्ट्राइक क्षमता: समुद्री और ज़मीनी दोनों लक्ष्यों पर प्रभावी
- स्टील्थ फीचर: लो-रेडार क्रॉस सेक्शन, जिससे डिटेक्शन मुश्किल होता है
एशिया-प्रशांत में शक्ति संतुलन
भारत और इंडोनेशिया के बीच हाल ही में हुए ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज़ मिसाइल समझौते ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा समीकरणों को नया आयाम दिया है। इंडोनेशिया और फिलीपींस दोनों ही दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव से चिंतित हैं। भारत द्वारा इन देशों को ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति करना न केवल उनकी रक्षा क्षमता को मजबूत करता है, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को भी बदलता है। भारत इस तरह से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक विश्वसनीय सुरक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है। यह कदम अमेरिका और जापान जैसे देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को भी पूरक करता है। इंडोनेशिया और फिलीपींस के साथ ब्रह्मोस मिसाइल डील भारत की रक्षा निर्यात नीति की बड़ी सफलता है। भारत की “मेक इन इंडिया” रक्षा नीति का यह सौदा एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। ये डील्स एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को नया आयाम देते हैं और भारत को वैश्विक हथियार बाज़ार में एक मजबूत खिलाड़ी बनाते हैं। लंबे समय तक भारत को केवल आयातक देश के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब वह रक्षा निर्यातक के रूप में उभर रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री भारत की तकनीकी क्षमता और रणनीतिक विश्वसनीयता का प्रमाण है।










