बांग्लादेश आया अपनी औकात पर, भारत से मांगा अतिरिक्त डीज़ल

By Alok Ranjan

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Bangladesh fuel cris
  • 50 हजार मीट्रिक टन डीज़ल मांगा
  • भारत ने डीज़ल सप्लाई शुरू कर दी
  • मिडिल-ईस्ट वॉर से एनर्जी क्राइसिस बढ़ी
  • स्कूल-कॉलेज-यूनिवर्सिटीज़ बंद की गयीं

भारत से डीज़ल आपूर्ति की मांग

बांग्लादेश इस समय गंभीर ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। डीज़ल और रसोई गैस की कमी ने न केवल उद्योगों और परिवहन को प्रभावित किया है बल्कि आम जनजीवन और शिक्षा व्यवस्था तक को हिला दिया है। इससे राहत के लिए बांग्लादेश ने भारत से अतिरिक्त डीज़ल आपूर्ति की मांग की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेश ने भारत से 50,000 मीट्रिक टन अतिरिक्त डीज़ल की मांग की है। यह मांग मौजूदा वार्षिक आयात व्यवस्था से अलग है, जिसके तहत बांग्लादेश भारत के नुमालिगढ़ रिफाइनरी से लगभग 180,000 मीट्रिक टन डीज़ल आयात करता है। बांग्लादेशी न्यूज़ वेबसाइट बार्ता 24 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत से 5,000 टन डीज़ल की पहली खेप पाइपलाइन के जरिए बांग्लादेश पहुंच चुकी है।

खराब रिश्तों के बावजूद बांग्लादेश की मदद

भारत से डीज़ल बांग्लादेश पहुंचना शुरू हो गया है इसकी पुष्टि बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के महाप्रबंधक (ट्रेड एंड ऑपरेशंस) मुहम्मद मोर्शेद हुसैन आज़ाद ने की है। रविवार को बांग्लादेश के वित्त मंत्री अमीर खस्रु महमूद चौधरी ने ढाका में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा से मुलाकात की। बैठक में बांग्लादेश ने अगले चार महीनों में अतिरिक्त 50,000 मीट्रिक टन डीज़ल की आपूर्ति का औपचारिक प्रस्ताव रखा। यह कदम “फ्रेंडशिप पाइपलाइन” के जरिए तेज़ी से ईंधन पहुंचाने की योजना का हिस्सा है।

किसने क्या कहा?

प्रणय वर्मा (भारत के उच्चायुक्त, ढाका):
“बांग्लादेश भारत का महत्वपूर्ण मित्र है और हम उसकी प्रगति के लिए हर संभव सहयोग देना चाहते हैं।”

अमीर खस्रु महमूद चौधरी (वित्त मंत्री, बांग्लादेश):
उन्होंने भारतीय उच्चायुक्त से मुलाकात कर ईंधन संकट पर चर्चा की और अतिरिक्त डीज़ल आपूर्ति का औपचारिक प्रस्ताव रखा।

बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC):
BPC ने पुष्टि की है कि भारत से डीज़ल की आपूर्ति शुरू हो चुकी है।

बांग्लादेश में कब शुरू हुई थी एनर्जी क्राइसिस ?

संकट की शुरुआत 5 मार्च को हुई थी जब ईंधन की कमी की आशंका से लोग बड़ी संख्या में पेट्रोल पंपों पर पहुंचने लगे। अचानक बढ़ी मांग के कारण सरकार को तेल बिक्री पर सीमाएं लगानी पड़ीं। इसके बाद से पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं, जिससे शहरों में भारी ट्रैफिक जाम और अफरातफरी का माहौल बन गया। कई जगहों पर झगड़े और अप्रिय घटनाएं हुईं, जिनमें एक व्यक्ति की मौत भी दर्ज की गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने पुलिस को पेट्रोल पंपों पर तैनात किया, सेना को डिपो पर भेजा और मोबाइल कोर्ट चलाए। इसके बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। लोग घंटों लाइन में खड़े होकर ईंधन पाने की कोशिश कर रहे हैं और असंतोष लगातार बढ़ रहा है। बांग्लादेश का संकट केवल डीज़ल तक सीमित नहीं है।

बांग्लादेश में एनर्जी संकट की जड़ें बेहद गहरी

  • खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधित होने से ईंधन आयात प्रभावित हुआ है।
  • रसोई गैस (LPG) की कमी ने घरेलू जीवन को कठिन बना दिया है।
  • बिजली उत्पादन में गिरावट आई है क्योंकि गैस और डीज़ल आधारित पावर प्लांट पर्याप्त ईंधन नहीं पा रहे।

असर: शिक्षा और जनजीवन

इस संकट का असर सीधा जनता पर पड़ा है। परिवहन ठप होने के कारण बांग्लादेश सरकार को स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद करने का निर्णय लेना पड़ा। टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, उत्पादन घटने से प्रभावित हो रहा है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें, घरेलू गैस सिलेंडर की कमी और महंगाई ने आम नागरिकों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। बांग्लादेश का ईंधन और गैस संकट उसके सामाजिक और आर्थिक ढांचे को गहराई से प्रभावित कर रहा है। भारत से डीज़ल आपूर्ति इस संकट को कुछ हद तक कम कर सकती है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए बांग्लादेश को भारत से अपने रिश्ते पुराने वक्त की तरह सामान्य करने होंगे।

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