- सुखोई 30 MKI का ये 12वां हादसा
- वायु सेना ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी गठित की
- 5 मार्च को शाम में हुआ हादसा
- फाइटर जेट ट्रेनिंग उड़ान पर था
असम के करबी आंगलोंग ज़िले में भारतीय वायुसेना का सुखोई Su-30MKI फाइटर जेट ट्रेनिंग मिशन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में दो बहादुर पायलट स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुर्गाकर ने अपनी जान गंवा दी। यह घटना 5 मार्च 2026 की शाम को जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद हुई।
हादसे की पूरी जानकारी
- तारीख और स्थान: 5 मार्च 2026, करबी आंगलोंग ज़िला, असम (जोरहाट से लगभग 60 किमी दूर)।
- विमान का प्रकार: सुखोई Su-30MKI – दो इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर जेट, जिसे रूस के सुखोई डिज़ाइन ब्यूरो ने विकसित किया और भारत में HAL द्वारा लाइसेंस के तहत निर्मित किया जाता है।
- मिशन: यह एक रूटीन ट्रेनिंग मिशन था।
घटना क्रम:
सुखोई 30 फाइटर जेट असम के जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरी और उड़ान के कुछ ही समय के बाद उनका रडार संपर्क टूट गया। देर शाम खोज अभियान शुरू हुआ और विमान करबी आंगलोंग क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त पाया गया। दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की गई है। भारतीय वायुसेना ने अपने दोनों पायलट स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुर्गाकर के वीरगति प्राप्त होने पर गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें “वीर योद्धा” बताया।
स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुर्गाकर कौन थे?
भारतीय वायुसेना के दो वीर पायलट – स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुर्गाकर – असम के जोरहाट एयरबेस पर तैनात सुखोई Su-30MKI स्क्वाड्रन का हिस्सा थे। दोनों अधिकारी भारतीय वायुसेना की 47 स्क्वाड्रन से जुड़े थे,जो देश की वायु रक्षा में अहम भूमिका निभाती है। बतौर कॉम्बैट पायलट, वो नियमित रूप से ट्रेनिंग sorties और ऑपरेशनल readiness मिशन संचालित करते थे। इन मिशन का उद्देश्य था वायुसेना की एयर डिफेंस तैयारियों को हमेशा उच्च स्तर पर बनाए रखना। स्क्वाड्रन लीडर अनुज का पद उनके व्यापक उड़ान अनुभव और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। वे स्क्वाड्रन में मार्गदर्शन और जिम्मेदारी निभाने वाले वरिष्ठ अधिकारी थे। फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुर्गाकर अपेक्षाकृत युवा पायलट थे, लेकिन वे ऑपरेशनल ट्रेनिंग और मिशनों में सक्रिय रूप से शामिल रहते थे। उनकी ऊर्जा और समर्पण वायुसेना के लिए अमूल्य था। फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुर्गाकर महाराष्ट्र के नागपुर के रहने वाले थे, जबकि स्क्वाड्रन लीडर अनुज दिल्ली से ताल्लुक रखते थे। अनुज और पुरवेश दुर्गाकर का सर्वोच्च बलिदान भारतीय वायुसेना के लिए एक बड़ी क्षति है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमारे पायलट हर दिन कठिन और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में प्रशिक्षण लेते हैं ताकि देश की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उनका साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।










