ग़ज़वा-ए-हिंद के खिलाफ आंध्र प्रदेश पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 12 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार

By Alok Ranjan

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भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ अपनी सतर्कता और क्षमता का परिचय दिया है। आंध्र प्रदेश पुलिस ने हाल ही में एक मल्टी-स्टेट ऑपरेशन चलाकर 12 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इनमें से तीन लोग विजयवाड़ा से हैं, जो पाकिस्तान जाकर आतंकी प्रशिक्षण लेने की तैयारी कर रहे थे। यह कार्रवाई बिहार, दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और राजस्थान सहित कई राज्यों में की गई।

विजयवाड़ा से पकड़े गए तीन मुख्य आरोपी

  • मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ – बाइक टैक्सी चालक, जिसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जिहादी गतिविधियों को फैलाया।
  • मिर्ज़ा सोहैल बेग – रहमतुल्लाह के साथ मिलकर युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित किया।
  • मोहम्मद दानिश – रहमतुल्लाह और सोहैल के साथ मिलकर “अल मलिक इस्लामिक यूथ” नामक संगठन बनाया।
  • ये AQIS (अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट) और ISIS से जुड़े विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में थे।

अल मलिक इस्लामिक यूथ और ग़ज़वा-ए-हिंद

इस संगठन का उद्देश्य युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और ग़ज़वा-ए-हिंद की अवधारणा को फैलाना था। रहमतुल्लाह और उसके साथियों ने ISIS का झंडा फहराया, राष्ट्रीय ध्वज जलाया, राष्ट्रगान का मज़ाक उड़ाया और भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की बात कही। सोशल मीडिया पर इन्होंने खुद को “मुजाहिदीन” के रूप में पेश किया और ओसामा बिन लादेन के वीडियो देखकर उसकी नकल की।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान जाने की तैयारी

जांच में खुलासा हुआ कि ये तीनों लोग पाकिस्तान जाकर आतंकी प्रशिक्षण लेने की योजना बना रहे थे। इनके संपर्क में “Benex Com” नामक ISIS-लिंक्ड ग्रुप भी था। ये अन्य दूसरे मुसलमान नौजवानों को भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान जाकर प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

गिरफ्तारी कैसे हुई ?

  • इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर आंध्र पुलिस ने कई राज्यों में टीमें भेजीं।
  • सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी से इनके नेटवर्क का पता चला।
  • गिरफ्तारियों के दौरान डिजिटल उपकरण, कट्टरपंथी साहित्य और ऑनलाइन प्रचार सामग्री बरामद हुई।

पकड़े नहीं जाते तो खतरा कितना बड़ा था?

ये लोग पाकिस्तान जाकर प्रशिक्षण लेते और लौटकर भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते। नौजवानों को गुमराह कर बड़ी संख्या में कट्टरपंथी बनाने का प्रयास जारी था। राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा था क्योंकि ये AQIS और ISIS जैसे संगठनों से सीधे जुड़े हुए थे। AQIS और ISIS जैसे संगठनों को भारत में मजबूत आधार मिल जाता।

बरामदगी और सबूत

पुलिस ने छापेमारी के दौरान कई अहम सबूत बरामद किए। लैपटॉप और मोबाइल फोन जिनमें कट्टरपंथी वीडियो और चैट्स मौजूद थे। ISIS और AQIS से जुड़े डिजिटल कंटेंट। संगठनात्मक दस्तावेज़ और प्रचार सामग्री। सोशल मीडिया अकाउंट्स जिनसे युवाओं को गुमराह किया जा रहा था। यह कार्रवाई दिखाती है कि भारत में आतंकी नेटवर्क सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। आंध्र पुलिस की समय रहते की गई कार्रवाई ने एक बड़े खतरे को टाल दिया। इस घटना से स्पष्ट है कि साइबर निगरानी, इंटेलिजेंस साझेदारी और मल्टी-स्टेट ऑपरेशन ही ऐसे नेटवर्क को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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