भारत के स्वदेशी S-400 एयर डिफेंस को बड़ी कामयाबी, प्रोजेक्ट कुश का डेवलपमेंट ट्रायल पूरा

By Alok Ranjan

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  • प्रोजेक्ट कुश (Kusha) भारत के सुदर्शन चक्र नेटवर्क का हिस्सा होगा
  • DRDO-BEL मिलकर बना रहे हैं स्वदेशी लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम
  • पूरे भारत को मज़बूत एयर डिफेंस से लैस करने का महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट
  • सीमा की सुरक्षा के साथ-साथ देश के बड़े शहरों को शील्ड किया जाएगा

🔑 क्या है भारत का प्रोजेक्ट कुश (Kusha)

DRDO ने लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम प्रोजेक्ट कुश का पहला डेवलपमेंट ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। रिपोर्ट्स बता रही हैं कि DRDO और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने इस एयर डिफेंस सिस्टम के ग्राउंड वैलिडेशन को कामयाबी से पूरा कर लिया है। इसमें डुअल-पल्स रॉकेट मोटर का ट्रायल भी शामिल है। इस टेस्ट का मतलब है कि ये प्रोजेक्ट अब अपने डेवलपमेंट के नेक्स्ट फेज की तरफ बढ़ गया है जो होगा इंटीग्रेटेड फ़्लाइट टेस्ट।

  • नाम: Extended Range Air Defence System (ERADS)
  • डेवलपर: Defence Research and Development Organisation (DRDO)
  • लॉन्च: प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2025 को “सुदर्शन चक्र मिशन” के तहत इसकी घोषणा की थी
  • लागत: लगभग ₹21,700 करोड़

भारत का ‘प्रोजेक्ट कुश’ एक स्वदेशी मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम है जिसे DRDO विकसित कर रहा है। इसे रूस के S-400 और S-500 जैसे अत्याधुनिक सिस्टम की तर्ज पर बनाया जा रहा है और इसका उद्देश्य भारत को फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे हवाई खतरों से सुरक्षित करना है। इसी साल जनवरी में DRDO के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेट्री हैदराबाद के डायरेक्टर A Raju ने बताया था कि-

DRDL के डायरेक्टर का ये बयान जनवरी का था और अब ये ख़बर आ चुकी है कि कुश का डेवलपमेंटल ट्रायल पूरा हो गया है यानी अब इस एयर डिफेंस सिस्टम ने यूज़र ट्रायल की तरफ एक और क़दम बढ़ा दिया है। ये भारत का अपना लॉन्ग रेंज मल्टी लेयर एयर डिफेंस सिस्टम है। इसमें फ्रेगमेंटेशन वारहेड का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी इंटरसेप्टर मिसाइल की स्पीड 5.5 Mach है।इसमें तीन तरह की इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल किया जाएगा। इन्हें M-1, M-2 और M-3 का नाम दिया गया है। यहां M का मतलब है मार्क- यानी मार्क-1, मार्क 2 और मार्क 3

⚙️तकनीकी लेयर्स और मिसाइल वेरिएंट्स

📡 रडार और सेंसर सिस्टम

  • लॉन्ग-रेंज रडार: 500 किमी तक की डिटेक्शन क्षमता
  • मल्टी-फंक्शन रडार: एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक और गाइड करने की क्षमता
  • कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम: सभी लेयर्स को जोड़कर एकीकृत प्रतिक्रिया देने वाला नेटवर्क

इसमें Hybrid यानी रेडियो फ्रिक्वेंसी या इन्फ्रारेड के साथ-साथ डेटालिंक गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे Transporter Erector Launcher से लॉन्च किया जा सकेगा।अच्छी बात ये है कि एक ही लॉन्चर से तीनों वैरिएंट की इंटरसेप्टर मिसाइलों को दागा जा सकेगा। ये तीनों इंटरसेप्टर मिसाइलें फाइटर जेट्स, UCAVS, गाइडेड वेपन्स को तबाह करने की क्षमता रखेंगी। लॉन्ग रेंज वाली इंटरसेप्टर यानी M3 बैलेस्टिक मिसाइल्स के साथ-साथ दुश्मन के अवाक्स और एयर फ्यूलर को टारगेट कर सकती हैं।

कैसे काम करेगा कुश (Kusha) एयर डिफेंस ?

ये सिस्टम एक कमांड सेंटर से जुड़ा होगा जिसके रडार दुश्मन के एयरक्राफ्ट और मिसाइल अटैक्स को ट्रैक कर सकेंगे। इसमें Long Range ballistic Missile Radar, Multi-Function Radar और Fire Control Radar का इस्तेमाल किये जाने की बात की जा रही है। ख़बर ये भी आ चुकी है कि DRDO प्रोजेक्ट कुश में Digital Beam Forming Radar का इस्तेमाल करने जा रहा है जिसकी रेंज 500 किलोमीटर की है।यानी ये रडार 500 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन की मिसाइलों और फाइटर जेट्स को ट्रैक और ट्रेस कर सकते हैं।इन्हीं खूबियों की वजह से ये S-400, Akash Air Defence System के साथ-साथ भारत के सुदर्शन चक्र प्रोग्राम का एक अहम हिस्सा बनने वाला है।

🛡️रणनीतिक महत्व

  • भारत की आत्मनिर्भरता: विदेशी सिस्टम पर निर्भरता कम होगी।
  • पाकिस्तान और चीन पर दबाव: यह सिस्टम भारत की हवाई सुरक्षा को इतना मजबूत करेगा कि पड़ोसी देशों को किसी भी कार्रवाई से पहले कई बार सोचना पड़ेगा।
  • मल्टी-लेयर सुरक्षा: बड़े शहरों, सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा कवच।

प्रोजेक्ट कुश की संभावित तैनाती दिल्ली, मुंबई और प्रमुख सैन्य ठिकानों पर होगी, ताकि बड़े शहरों और सामरिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को मल्टी-लेयर सुरक्षा दी जा सके। शुरुआती चरण में इसे चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं के पास भी तैनात करने की योजना है, ठीक वैसे ही जैसे भारत ने S-400 स्क्वाड्रन को सीमावर्ती इलाकों में लगाया था।

🛡️ संभावित तैनाती क्षेत्र

1. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली)

– महत्त्व: राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र, संसद, राष्ट्रपति भवन, रक्षा मंत्रालय।

– कारण: किसी भी हवाई हमले या मिसाइल हमले से बचाव के लिए सबसे प्राथमिक क्षेत्र।

2. मुंबई और पश्चिमी तट

– महत्त्व: भारत की आर्थिक राजधानी, नौसेना का वेस्टर्न कमांड।

– कारण: समुद्री मार्गों और आर्थिक केंद्रों की सुरक्षा।

3. पूर्वी और पश्चिमी सीमाएँ

– महत्त्व: चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाएँ।

– कारण: सीमा पार से आने वाले फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकना।

– लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश (चीन सीमा)

– पंजाब और राजस्थान (पाकिस्तान सीमा)

4. प्रमुख सैन्य ठिकाने

– पठानकोट एयरबेस

– ग्वालियर और जोधपुर एयरबेस

– विशाखापट्टनम नौसेना ठिकाना

– कारण: वायु सेना और नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता को सुरक्षित रखना।

पिछले साल मई DRDO के चेयरमैन डॉ समीर कामथ ने बताया था कि इस एयर डिफेंस का डेवलपमेंट 2028 में पूरा होगा और उसके बाद इसका इंडक्शन होगा। अब जबकि ये ख़बर आ चुकी है कि इस एयर डिफेंस सिस्टम का डेवलपमेंटल ट्रायल पूरा हो चुका है तो उम्मीद है कि ये प्रोजेक्ट अपने समय पर पूरा होगा।

2 thoughts on “भारत के स्वदेशी S-400 एयर डिफेंस को बड़ी कामयाबी, प्रोजेक्ट कुश का डेवलपमेंट ट्रायल पूरा”

  1. यह सरकार देश की सुरक्षा के प्रति अति संवेदनशील हैं. अपने काम के प्रति अत्यन्त जागरूक और काम तय समय पर पूरा करने में प्रयत्नशील हैं. यह काम करतेसमय कोई गडबड या पैसो की हेराफेरी ना हो इसके लिए केवल जागरूक नहीं बल्की वचनबद्ध हैं. देश के नागरिक होने के नाते ये सरकार, इसमे शामिल सभी सुरक्षा संस्थान, हमारे वैज्ञानिक, सभी सहकारी हमारे विश्वास के पात्र हैं. हम इन सभी का अभिनंदन करते हैं और उनको मनसे धन्यवाद कहते हैं. जय हिंद.

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